जीएसटी में बीड़ी को डीमेरिट गुड श्रेणी तथा सभी तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत टैक्स रखने की अपील

#नईदिल्ली :वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस सहित अनेक सामाजिक संस्थाअेां ने केंद्रीय वित मंत्री अरुण जेटली और उनके सलाहकारों से नए अप्रत्यक्ष कर ढांचे में बीड़ी समेत समस्त तंबाकू उत्पादों पर समान रूप से ज्यादा कर लगाया जाने की अपील की है। जीएसटी कौंसिल की एक महत्वपूर्ण बैठक 18 फरवरी को होने वाली है। इससे पहले कई अग्रणी जन स्वास्थ्य समूहों ने केंद्रीय वित्त मंत्री से यह सुनिश्चित करने की अपील की है कि सभी तंबाकू उत्पाद, खासकर बीड़ी डीमेरिट गुड श्रेणी में रखे जाएं और इन पर जीएसटी की दर 28ः हो तथा सेस की सर्वोच्च संभव दर अतिरिक्त रूप से लगाई जाए। नई कर व्यवस्था एक जुलाई से लागू होने वाली है। जीएसटी व्यवस्था के तहत भिन्न सामानों और सेवाओं पर कर दर की चर्चा की जाएगी।

इस समय सिगरेट, बीड़ी और बगैर धुंए वाले तंबाकू पर कुल कर भार 53 प्रतिशत, 19.5 प्रतिशत और 56 प्रतिशत है। भारत में तंबाकू पर कराधान विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों की तुलना में बहुत कम है। इसके मुताबिक, इन उत्पादों पर टैक्स भार खुदरा मूल्य का कम से कम 75 प्रतिशत होना चाहिए। 2017-18 के केंद्रीय बजट में भी इस गड़बड़ी को दूर नहीं किया गया है और टैक्स में प्रभावी वृद्धि 6 प्रतिशत है और यह पिछले बजट में देखी गई कम से कम 10 प्रतिशत की तुलना में कम है।

तंबाकू के कारण हर साल 10 लाख मौत हो रही है। इसके मद्देनजर जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वालों का मानना है कि तंबाकू क्षेत्र में सरकार की कराधान नीतियों ने जन स्वास्थ्य की चिन्ता को दूर नहीं किया है। अकेले राजस्थान में ही 72 हजार से अधिक लेाग बेमौत मर रहे है।

तंबाकू उत्पादों को जीएसटी की निम्न दरों में रखने से इसका नकारात्मक संदेश जायेगा। जिससे बीड़ी जैसे तंबाकू उत्पादों का उपयोग और अधिक बढ़ेगा। भारत में बीड़ी सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला तंबाकू उत्पाद है और तंबाकू की कुल खपत में इसका योगदान 64 प्रतिशत है और गरीबों में इसका सेवन गैर आनुपातिक है। तंबाकू से होने वाली मौतों में बीड़ी का योगदान सबसे ज्यादा होता है और इसके साथ ही तंबाकू के उपयोग से भारी आर्थिक बोझ पड़ता है।

तंबाकू उत्पादों पर 2017-18 के हाल के बजट में प्रस्तावित उत्पाद शुल्क वृद्धि पिछले बजट की तुलना में भी कम है क्योंकि भिन्न तंबाकू उत्पादों पर चालू बजट में प्रस्तावित वृद्धि अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और बेसिक या बुनियादी उत्पाद (बीईडी) शुल्क में है जो सिर्फ 6 प्रतिशत है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि बजट में हाथ से बनाई जाने वाली तेन्दू के पत्तों की बीड़ी पर पहले के वर्षों की तरह उत्पाद शुल्क में वृद्धि नहीं की गई है जबकि बीड़ी पीने वाले 98 प्रतिशत इसी का सेवन करते हैं। इसकी बजाय कागज की बीड़ी पर वृद्धि की गई है जबकि बाजार में इसकी हिस्सेदारी नगण्य है। इस तरह, एक बार फिर बीड़ी बेहद किफायती है और व्यावहारिक तौर पर अनियंत्रित जहर है जो 67.5 मिलियन बीड़ी उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध है।

आईआईटी जोधपुर में असिस्टैंट प्रोफेसर डॉ. रिजो जॉन के मुताबिक, “तंबाकू उद्योग जानता है कि उपभोक्ताओं से फायदा कैसे उठाना है। इसलिए यह हर साल टैक्स में जिस वृद्धि का प्रस्ताव करती है उससे बहुत ज्यादा वृद्धि कीमतों में कर लेता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार इससे सीख नहीं लेती है और बाद में इसी अनुपात में वृद्धि नहीं करती है। तंबाकू उत्पादों पर टैक्स में सामान्य तौर पर 10 से 15 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद की जाती है पर इस बार बजट में सिर्फ 6 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की गई है और यह तंबाकू उद्योग के लिए वरदान है। सरकार को चाहिए कि सभी तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत की सर्वोच्च डीमेरिट रेट तथा इसपर सर्वोच्च संभव सेस लागू कर दे। नई लागू होने वाली जीएसटी व्यवस्था में सुधार के उपाय नहीं किए गए तो यह भारत में जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर झटका होगा।”

भारत समेत दुनिया भर में किए गए अनुसंधान में यह दोहराया गया कि तंबाकू के खतरे से निपटने के लिए कराधान निश्चित रूप से सर्वश्रेष्ठ तरीका है। यह महत्वपूर्ण है कि जीएसटी व्यवस्था में कर का कुल बोझ मौजूदा कर भार से कम ना हो ताकि राजस्व वसूली समान रहे और जनस्वास्थ्य की दिशा में चल रही प्रगति बनी रहे।

वायॅस ऑफ टोबेको विक्टिमस के पैटर्न व स्वामी रामा हिमालयन यूनिवर्सिटी के डा.सुनील सैनी ने बताया कि तंबाकू उपयोगकर्ताओं की संख्या के लिहाज से भारत दुनिया भर में दूसरे नंबर पर है (275 मिलियन या सभी वयस्कों में 35 प्रतिशत) इनमें से कम से कम 10 लाख हर साल तंबाकू से संबंधित बीमारी से मर जाते हैं। तंबाकू उपयोग के कारण होने वाली बीमारी की कुल प्रत्यक्ष और परोक्ष लागत 2011 में 1.04 लाख करोड़ ($17 बिलियन) या भारत के सकल घरेलू उत्पाद का 1.16 प्रतिशत है।

टाटा मेमारियल अस्पताल के प्रोफेसर और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. पंकज चतुर्वेदी ने कहा, “मुझे ऐसे उत्पाद के लिए टैक्स में छूट देने का कोई तर्क नजर नहीं आता है जिन पर चेतावनी लिखी होती है कि वह मारता है। दरअसल यह बाजार में उपलब्ध सबसे सस्ता और अनियंत्रित जहर है। टैक्स की मौजूदा शैली में उपभोक्ता और देश को नुकासन हो रहा है जबकि मुट्ठी भर कारोबारी परिवार (बीड़ी और खैनी, पान मसाला उद्योग के स्वामी) बड़े पैमाने पर विध्वंस करने वाले हथियार की बिक्री से इस भारी मुनाफा कमा रहे हैं।

लगभग 48 प्रतिशत पुरुष और 20 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं (वयस्क आबादी का कुल 35 प्रतिशत) – इनमें से कम से कम 10 लाख लोगों की मौत हर साल तंबाकू से जुड़ी बीमारी से होती है। तंबाकू बाजार में बीड़ी का हिस्सा 48 प्रतिशत, खैनी-पान मसाला आदि 38 प्रतिशत और सिगरेट 14 प्रतिशत है। इसलिए, यह स्पष्ट है कि इन मौतों में बीड़ी की अच्छी-खासी हिस्सेदारी है।

“पिछले कई वर्षों के दौरान तंबाकू उत्पादों के मामले में उत्पाद शुल्क में कम से 10 प्रतिशत की प्रभावी वृद्धि होती रही है और यह नियम सा है। ऐसे में महज 6 प्रतिशत की वृद्धि तंबाकू उद्योग के लिए वरदान है और हमारे देश में जनस्व