सरकारी प्रिंटिंग प्रेस का आधुनिकीकरण 338 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा

नई दिल्लीः नई दिल्‍ली में मिंटो रोड पर स्थित भारत सरकार की प्रिंटिंग प्रेस के आधुनिकीकरण एवं पुनर्विकास का कार्य 338.56 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा। शहरी विकास मंत्री श्री एम. वें‍कैया नायडू ने इस संबंध में स्‍थायी वित्‍त समिति की सिफारिश स्‍वीकार कर ली है।

इस प्रिंटिंग प्रेस की वर्तमान इमारत का पुनर्विकास 238.56 करोड़ रुपये की लागत से किया जाएगा। इस इमारत को ग्राउंड फ्लोर के अलावा छह-छह मंजिलों वाले तीन ब्‍लॉकों के रूप में विकसित किया जाएगा, जो आधुनिक तकनीक एवं उपकरणों को समाहित करने के लिहाज से उपयुक्‍त होंगे। इन तकनीकों एवं उपकरणों की स्‍थापना लागत 100 करोड़ रुपये होगी।

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मौजूदा समय में जिन मशीनों एवं उपकरणों का इस्‍तेमाल किया जा रहा है उनमें से ज्‍यादातर वर्ष 1980 से लेकर वर्ष 2005 में लगाए गए थे। यही नहीं, इनमें से कुछ उपकरणों को वर्ष 1968 में लगाया गया था। इस वजह से उत्‍पादन लागत काफी ज्‍यादा है और छपाई की कुल मांग भी समय पर पूरी नहीं हो पाती है। इसके कलपु‍र्जे भी बाजार में उपलब्‍ध नहीं हैं, जो कि इनके उन्‍नयन के लिए आवश्‍यक हैं।

पुनर्विकास एवं आधुनिकीकरण के कार्य पूरे हो जाने के बाद राष्‍ट्रीय राजधानी में मिंटो रोड स्थि‍त भारत सरकार की प्रिंटिंग प्रेस की उत्‍पादन क्षमता मौजूदा प्रतिदिन 16 लाख ब्‍लैक एंड व्‍हाइट पृष्‍ठों (ए-5 साइज, 60 करोड़ पृष्‍ठ प्रति वर्ष) से बढ़कर प्रतिदिन 45 लाख कलर पृष्‍ठों (164.96 करोड़ पृष्‍ठ प्रति वर्ष) के स्‍तर पर पहुंच जाएगी, जिससे उत्‍पादन क्षमता में 177 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होगी। मौजूदा समय में मल्‍टी-कलर प्रिंटिंग उपलब्‍ध नहीं है, जिसे सुलभ कराया जाएगा।

सरकारी प्रिंटिंग प्रेस संसद के दोनों ही सदनों की छपाई संबंधी समस्‍त जरूरतों की पूर्ति करती है। इस प्रिंटिंग प्रेस के पुनर्विकास एवं आधुनिकीकरण का समस्‍त कार्य अभी से लेकर अगले 52 महीनों में पूरा किया जाएगा। 22,017 वर्ग मीटर की उपलब्‍ध भूमि में से लगभग 1.50 एकड़ भूमि वित्‍त मंत्रालय को हस्‍तांतरित की जाएगी। महालेखा नियंत्रक एवं सार्वजनिक वित्‍त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) की इमारतों के निर्माण के लिए यह भूमि हस्‍तांतरित की जाएगी।