टिड्डी दल झांसी तक आया, छतरपुर पहुंच सकता है फसलों को बचाने कृषि विभाग ने जारी की किसानों के लिए सलाह, 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़कर फसलों को कर रहा तबाह

छतरपुर। प्रदेश के कई हिस्सों में फसलों को तबाह कर रहे टिड्डी दल के छतरपुर पहुंचने की आशंकाएं गहराने लगी हैं। ग्वालियर संभाग के बाद झांसी क्षेत्र के कई हिस्सों में टिड्डी दल के पहुंचने की खबरें मिलने लगी हैं। विशेष प्रकार के कीटों का यह दल 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़कर फसलों को तबाह कर रहा है।

किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के उप संचालक मनोज कश्यप ने बताया कि टिड्डी दल फसलों को नुकसान पहुंचाने वाला कीट हैं जो कि समूह में एक साथ चलता है और बहुत लम्बी-लम्बी दूरियों तक उड़ान भरता है। यह फसल को चबाकर, काटकर खाने से नुकसान पहुंचाता है। अत: स्पष्ट है कि ये उद्यानिकी फसलों, वृक्षों एवं कृषि की फसलों को बहुत बड़े स्वरूप में एक साथ हानि पहुँचा सकता है। यदि जिले में टिड्डी दल का प्रकोप होता है तो इसके नियंत्रण के लिये किसान भाई दो प्रकार के साधन अपना सकते है।

इस तरह उपाय करें किसान
उन्होंने कहा कि किसान भाई टोली बनाकर विभिन्न प्रकार से परम्परागत उपाय जैसे शोर मचाकर, ध्वनि वाले यंत्रों को बजाकर डराकर भगाया जा सकता है इसके लिये मांदल, ढोलक, ट्रैक्टर / मोटर साइकिल का सायलेंसर, खाली टीन के डिब्बे , थाली इत्यादि से भी सामूहिक प्रयास से ध्वनि की जा सकती है। ऐसा करने से टिड्डी दल नीचे नहीं आकर फसलों पर न बैठकर आगे प्रस्थान कर जाते है।

दूसरा तरीका रसायनिक नियंत्रण है जिसमें सुबह से कीटनाशी दवा ट्रैक्टर चलित स्ने पंप, पावर स्प्रेयर द्वारा, जैसे क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी 1200 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 इसी 600 मिली अथवा लेम्डाईलोथिन 5 इसी 400 मिली, डाईफलूबिनज्यूरॉन 25 डब्ल्यूटी 240 ग्राम प्रति हैक्ट 600 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।