GST पर संसद में चर्चा, जेटली गिना रहे हैं नए टैक्स कानून के फायदे

नई दिल्ली। अरुण जेटली लंबे समय से जीएटी बिल पास करवाने की जुगत में लगे हैं और उनकी ये कोशिश अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। बुधवार को लोकसभा में जीएसटी से जुड़े अन्य 4 बिलों पर चर्चा हो रही है।

वीरप्पा मोइली

  • राज्यसभा अहम बिलों पर बहस नहीं कर सकती, यह संघीय ढांचे पर प्रहार है
  • जीएसटी में देरी के कारण भारतीयों का 12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
  • जीएसटी में कई दरें हैं, यह ‘एक देश – एक टैक्स’ नहीं है
  • जीएसटी जो पेश किया गया है, परिवर्तनकारी नहीं, बल्कि बचकाना कदम है
  • जीएसटी का एन्टी-प्रॉफिटीयरिंग क्लॉज काफी निरंकुश है
  • जीएसटी अभूतपूर्व बदलाव लाने वाला कदम है
  • वीरप्पा मोइली ने जीएसटी पर कहा है कि जीएसटी काउंसिल में मूलभूत स्तर पर विरोधाभास है :

जेटली

  • जीएसटी बिल पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में कहा- अधिकारों का दुरुपयोग न हो ये ध्यान रखना होगा
  • अरुण जेटली ने कहा, अभी तक कुछ टैक्स लगाने का अधिकार केंद्र को था कुछ का राज्य को, अब पूरे देश में एक टैक्स प्रणाली होगी
  • अरुण जेटली बोले- संसद को भी और राज्यों की विधानसभा को गुड्स और सर्विस पर टैक्स लगाने का अधिकार होगा. जीएसटी काउंसिल में 32 राज्यों के प्रतिनिधि हैं
  • संविधान संसोधन के तहत जीएसटी के तहत पहले पांच साल में किसी राज्य को घाटा होगा तो उसकी व्यवस्था की जाएगी
  • इसका लक्ष्य वस्तु और सेवाओं का बेहतर संचालन सुनिश्चित करता है. राज्य और केंद्र के बीच राजस्व का बंटवारा होगा
  • लग्जरी सामानों पर टैक्स में से 28% के बाद के हिस्से का इस्तेमाल राज्यों का घाटा पाटने के लिए किया जाएगा यहां चार कर कानून थे, उन सभी को मिलाकर एक किया गया है, क्योंकि उनका सब्जेक्ट मैटर समान था.

सोमवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ये चारों विधेयक संसद के निचले सदन में पेश किए थे। जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने टैक्स रिफॉर्म बिल पर चर्चा के लिए 7 घंटे आवंटित किए। वित्त मंत्री ने सेंट्रल जीएसटी, इंटीग्रेटेड जीएसटी, यूनियन टेरिटरी जीएसटी और कॉम्पेंसेशन जीएसटी बिलों को एक साथ सदन के पटल पर रखा है।

जीएसटी बिल की पूरी जानकारी यहां है

लोकसभा में आज गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़े चार बिलों पर ऐतिहासिक चर्चा शुरु हो गई है  क्या है जीएसटी बिल? लोकसभा में आज गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़े चार बिलों पर ऐतिहासिक चर्चा शुरु हो गई है लेकिन अगर आपको जीएसटी के बारे में ऐसा कुछ भी है जो आपको मालूम नहीं है तो ये पढ़ लीजिये.

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है. जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है. जहां जीएसटी लागू नहीं है, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं. सरकार अगर इस बिल को 2016 से लागू कर देती तो हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स जैसे करों की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगता.

क्या होंगे इसके फायदे?
-संविधान के मुताबिक केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर टैक्स लगा सकती हैं.
-अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है. जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी.
-नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है.

किन उत्पादों पर लागू होगा जीएसटी?
-2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा. सिर्फ अल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी.

कैसे काम करेगा जीएसटी?
-जीएसटी में तीन अंग होंगे – केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी.
-केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी.

केंद्रीय जीएसटी
सीजीएसटी के प्रावधानों के अनुसार जमीन को पट्टे, किराये या लाइसेंस पर देने को सेवा आपूर्ति माना जाएगा. इसी तरह किसी भवन को कारोबार आदि के लिए किराये पर देने को भी सर्विस सप्लाइ माना जाएगा.

स्टेट जीएसटी
स्टेट जीएसटी को भी केंद्रीय जीएसटी विधेयक के मॉडल पर ही तैयार किया गया है. इसके अलावा इंटीग्रेटेड जीएसटी के तहत वे नियम हैं, जिनमें गुड्स की इंटर-स्टेट मूवमेंट को लेकर बात की गई है.

यूनियन टेरिटरी जीएसटी
यूनियन टेरिटरी जीएसटी में केंद्र शासित प्रदेशों में इस व्यवस्था के प्रावधान निर्धारित किए गए हैं.
अगर जीएसटी भी वैट की तरह है तो फिर इसकी जरूरत क्यों?
-हालांकि जीएसटी भी वैट जैसा ही टैक्स है, लेकिन इसके लागू होने से कई और तरह के टैक्स नहीं लगेंगे.
-इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने से अभी लगने वाले वैट और सेनवेट दोनों खत्म हो जाएंगे.

किसी भी राज्य में सामान का एक दाम
-जीएसटी लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा. पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा. यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी. जैसे कोई कार अगर आप दिल्ली में खरीदते हैं तो उसकी कीमत अलग होती है, वहीं किसी और राज्य में उसी कार को खरीदने के लिए अलग कीमत चुकानी पड़ती है. इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा.

कर विवाद में कमी
-अगर यह लागू हो जाता है तो कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जाएगा. इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी. एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे. इसके अलावा जहां कई राज्यों में राजस्व बढ़ेगा तो कई जगह कीमतों में कमी भी होगी.

कम होगी सामान की कीमत
-इसके लागू होने से टैक्स का ढांचा पारदर्शी होगा जिससे काफी हद तक टैक्स विवाद कम होंगे. इसके लागू होने के बाद राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे. फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है.
-जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा.

किसको होगा नुकसान
-जीएसटी लागू होने से केंद्र को तो फायदा होगा लेकिन राज्यों को इस बात का डर था कि इससे उन्हें नुकसान होगा क्योंकि इसके बाद वे कई तरह के टैक्स नहीं वसूले पाएंगे जिससे उनकी कमाई कम हो जाएगी. गौरतलब है कि पेट्रोल व डीजल से तो कई राज्यों का आधा बजट चलता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने राज्यों को राहत देते हुए मंजूरी दे दी है कि वे इन वस्तुओं पर शुरुआती सालों में टैक्स लेते रहें. राज्यों का जो भी नुकसान होगा, केंद्र उसकी भरपाई पांच साल तक करेगा.

कांग्रेस लाएगी संशोधन प्रस्ताव
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई पार्टी सांसदों की मीटिंग में तय हुआ कि जीएसटी बिल पर लोकसभा में संशोधन प्रस्ताव लाया जाएगा. कांग्रेस व्यापकता में जीएसटी का विरोध नहीं करेगी लेकिन सांसद चर्चा के दौरान कुछ प्रस्तावों को लेकर चिंता प्रकट करेंगे और बात पर भी जोर देंगे कि जीएसटी का आइडिया उनके नेतृत्व में बनी यूपीए सरकार का था.