गैर-सरकारी संगठनों को बैंक खातों के संबंध में दिशानिर्देश जारी

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पारदर्शिता के लिए गृह मंत्रालय ने सभी गैर-सरकारी संगठनों को बैंक खातों के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए। मंत्रालय ने कहा है कि खातों में विदेश से फंड पाने वाले निजी और व्यावसायिक हितों वाले सभी एनजीओ को एक विदेशी सहित 32 नामित बैंकों में से किसी में भी एक महीने के अंदर खाता खुलवाना है आवश्यक।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने समय-समय पर बैंकों को स्वयं सहायता समूह – बैंक सहलग्नता कार्यक्रम के संबंध में अनेकों दिशा-निर्देश/अनुदेश जारी किए हैं। बैंकों को सभी अनुदेश एक स्थान पर उपलब्ध कराने के प्रयोजन से इस विषय पर विद्यमान दिशा-निर्देशों/अनुदेशों को समाहित करते हुए इस मास्टर परिपत्र को अद्यतन किया गया है जो इसके साथ संलग्न है। इस मास्टर परिपत्र में, परिशिष्ट में दिए गए अनुसार, रिज़र्व बैंक द्वारा 30 जून 2017 तक उक्त विषय पर जारी सभी परिपत्र समेकित एवं अद्यतन किए गए हैं।

1. देश में औपचारिक ऋण प्रक्रिया का तेजी से विस्तार होने के बावजूद, बहुत से क्षेत्रों में, विशेष रूप से आकस्मिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गरीब ग्रामीणों की निर्भरता अधिकांशत: साहूकारों पर ही थी। ऐसी निर्भरता सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग और जनजातियों के सीमान्त किसानों, भूमिहीन मजदूरों, छोटे व्यवसायियों और ग्रामीण कारीगरों में देखने को मिलती थी जिनकी बचत की क्षमता व राशि इतनी सीमित होती है कि बैंकों द्वारा उसे इक्टठा नहीं किया जा सकता।

कई कारणों से इस वर्ग को दिए जाने वाले ऋण को संस्थागत नहीं किया जा सका है। गैर सरकारी संगठनों द्वारा बनाए गए अनौपचारिक समूहों पर नाबार्ड, प्रशांत क्षेत्रीय ऋण संघ (एप्राका) और अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) द्वारा किए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि स्वयं सहायता बचत और ऋण समूहों में औपचारिक बैंकिंग ढांचे और ग्रामीण गरीबों को आपसी लाभ के लिए एकसाथ लाने की संभाव्यता है एवं उनका कार्य उत्साहजनक रहा है।

2. तदनुसार, नाबार्ड ने गैर-सरकारी संगठनों, बैंकों और प्रायोगिक परियोजना के अंतर्गत अन्य एजेंसिंयों द्वारा प्रवर्तित स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को शामिल करने हेतु एक प्रायोगिक परियोजना आरंभ की तथा उसे पुनर्वित्त का समर्थन प्रदान किया गया। नाबार्ड द्वारा कुछ राज्यों में परियोजना सहलग्नता के प्रभाव के मूल्यांकन के संबंध में किए गए त्वरित अध्ययन से प्रोत्साहनपूर्ण तथा सकारात्मक विशेषताएं सामने आई हैं यथा स्वयं सहायता समूहों के ऋण की मात्रा में वृद्धि, सदस्यों के ऋण ढांचे में आय न होने वाली गतिविधियों से उत्पादक गतिविधियों में निश्चित परिवर्तन, लगभग 100 प्रतिशतवसूली कार्यनिष्पादन, बैंकों और उधारकर्ताओं दोनों के लिए लेन-देन लागत में भारी कटौती इत्यादि के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह सदस्यों के आय स्तर में क्रमिक वृद्धि। सहलग्नता परियोजना की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि बैंकों से सहलग्न लगभग 85 प्रतिशत के समूह केवल महिलाओं द्वारा गठित थे।

3. एसएचजी और गैर संगठनों की कार्यप्रणाली के अध्ययन के विचार से ग्रामीण क्षेत्र में उनकी गतिविधियों और भूमिका के विस्तार के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने श्री एस. के. कालिया, नाबार्ड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक की अध्यक्षता में नवंबर 1994 में एक कार्यदल का गठन किया जिसमें प्रमुख गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, परामर्शदाता और बैंकर शामिल थे। कार्यदल का विचार था कि औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से अब तक अछूते ग्रामीण गरीब लोगों को ऋण उपलब्ध कराने की स्थिति में सुधार के लिए एसएचजी को बैंकों से सहलग्न करना एक लागत प्रभावी, पारदर्शी और लचीला उपाय है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वसूली तथा बारंबार अंतराल पर छोटे उधारकर्ताओं के साथ लेन-देन में उच्च लेन-देन लागत की बैंकों की दोहरी समस्या का अति आवश्यक समाधान प्रदान की जाने की आशा है।

अतः कार्यदल को ऐसा महसूस हुआ कि नीति का मुख्य उद्देश्य स्व-सहायता समूहों के गठन तथा बैंकों से उनकी सहलग्नता को प्रोत्साहित करना है और इस संबंध में बैंकों को मुख्य भूमिका निभानी होगी। कार्यदल ने सिफारिश की थी कि बैंकों को सहलग्नता कार्यक्रम को एक कारोबारी अवसर के रूप में लेना चाहिए तथा वे अन्य बातों के साथ-साथ संभाव्यता, स्थानीय आवश्यकताओं, उपलब्ध प्रतिभा/ कौशल आदि को ध्यान में रखकर क्षेत्र-विशिष्ट और समूह – विशिष्ट ऋण पैकेज बनाएं।

4. समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति विवरणी तथा केंद्र की बजट घोषणाओं में बैंकों के साथ एसएचजी की सहलग्नता पर ज़ोर दिया गया है तथा इस संबंध में बैंकों को विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। एसएचजी सहलग्नता कार्यक्रम को बढ़ावा देने तथा उसे कायम रखने हेतु बैंकों को सूचित किया गया हैं कि वे नीति और कार्यान्वयन दोनों स्तर पर एसएचजी उधार देने को अपनी मुख्य धारा के ऋण परिचालनों का ही एक भाग मानें। एसएचजी सहलग्नता को वे अपनी कारपोरेट कार्यनीति/ योजना, अपने अधिकारियों और स्टाफ के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल करें तथा इसे एक नियमित व्यवसायिक गतिविधि के रूप में लागू करें और आवधिक रूप से उसकी निगरानी एवं समीक्षा करें।

5. प्राथमिकताप्राप्त क्षेत्र के अन्तर्गत एक पृथक खंड : बैंक एसएचजी को दिए गए अपने उधारों की रिपोर्ट बिना किसी कठिनाई के कर सकें, इसलिए यह निर्णय लिया गया था कि बैंकों को चाहिए कि वे अपनी रिपोर्ट में एसएचजी के सदस्यों को आगे उधार देने के लिए एसएचजी को दिए गए ऋण को संबंधित श्रेणी नामतः “एसएचजी को दिए गए अग्रिम” दर्शाएं, चाहे एसएचजी के सदस्यों को दिए गए ऋण का प्रयोजन कुछ भी हों। एसएचजी को दिए गए ऋणों को बैंक कमज़ोर वर्गों को दिए गए अपने ऋण के एक भाग के रूप में शामिल करें।

6. बचत बैंक खाता खोलना : पंजीकृत और अपंजीकृत एसएचजी जो अपने सदस्यों की बचत आदतों को बढ़ाने के कार्य में संलग्न हैं, बैंकों के साथ बचत खाते खोलने हेतु पात्र हैं। यह आवश्यक नहीं है कि इन एसएचजी ने बचत बैंक खाते खोलने से पहले बैंकों की