कोरोना के ‘जनक’ चीन पर लोगों का फूटा गुस्सा : दुर्गा पंडाल में दिखा ‘असुर जिनपिंग’ का सिर, लोग बोले- मां दुर्गा के हाथों वायरस का किया खात्मा

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल में कोविड-19 महामारी और उच्च न्यायालय के आदेश के बीच शनिवार को महाष्टमी का पर्व फीका रहा और लोगों ने डिजिटल माध्यम से देवी के दर्शन किए. महाष्टमी को दुर्गा पूजा के चार दिनों में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. कोरोना महामारी के चलते पर्व फीका जरूर रहा लेकिन इस दौरान इस वायरस के ‘जनक’ देश चीन पर भी लोगों का खूब गुस्सा फूटा.

इसकी एक झलक देखने को मिली प. बंगाल के मुर्शिदाबाद में जहां लोगों ने असुर के सिर की जगह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सिर लगा दिया. जी हां, बंगाल के एक दुर्गा पंडाल में असुर की जगह चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का सिर लगाया गया. इस पंडाल के पूजा ऑर्गेनाइजर प्रलय गुप्ता ने कहा, “हम चाहते हैं कि इस पूजा के माध्यम से ये वायरस जो पूरे विश्व में छाया हुआ है खत्म हो जाए. दुर्गा मां के हाथ से हमने इसका खात्मा दिखाया है.”

बता दें कि पिछले साल दिसंबर में कोरोना वायरस चीन के वुहान शहर में पहली बार सामने आया था उसके बाद से अब पूरी दुनिया इसकी जद में है. जहां लाखों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं तो वहीं करोड़ों लोग इसकी जद में हैं. इस वायरस के बाद से लोग चीन से काफी नाराज हैं.

वैसे बंगाल में महाष्टमी पर्व की बात करें तो कोविड-19 के नियमों और पंडालों में सीमित संख्या में प्रवेश के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के मद्देनजर आयोजकों द्वारा ‘संधि पूजा’, ‘कुमारी पूजा’ और ‘संध्या आरती’ जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों का टीवी और अन्य माध्यमों पर सीधा प्रसारण किया गया. प्रसिद्ध ‘काली पूजो’ का डिजिटल माध्यम से बेलूर मठ समेत कई स्थानों पर प्रदर्शन किया गया. इस अनुष्ठान में आठ वर्ष से कम आयु की बच्ची की देवी दुर्गा के रूप में पूजा की जाती है.