“हिन्दू” स्थान बन चुका,आइये अब ‘आर्यावर्त’ बनायें..!
डॉ. राकेश पाठक
Twitter logo @DrRakeshPathak7
प्रधान संपादक, डेटलाइन इंडिया
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर प्राचीन भारत का एक नक्शा खूब पोस्ट हो रहा था।फेसबुक , व्हाट्सएप आदि पर टप्पे खाता हुआ ये नक्शा अतीत के अखंड भारत,भारत वर्ष , जम्बूद्वीप या आर्यावर्त का सपना फिर साकार करने को तैर रहा था।
एक खास सोच समझ के लोग लाइक , शेयर और फॉरवर्ड करके ख़ुशी के मारे लहालोट हो रहे थे।अब भी हो रहे होंगे। तब लगा था कि कहीं “कुछ” तो है जो अचानक ये ‘अखंड भारत’ या आर्यावर्त का सपना परोसा जा रहा है।आज साफ़ हो गया कि सचमुच कुछ था।बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने कह दिया है कि भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश फिर एक होंगे।राम माधव संघ के ज़िम्मेदार ओहदे पर रहे हैं और अब भी बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी निभा रहे हैं सो समझ जा सकता है कि बात बहुत सोच कर ही कही गयी है।
आइये ज़रा टाइमिंग पर गौर कीजिये।प्रधान मंत्री जिस दिन बिना तय प्रोग्राम के लाहौर जाते जाते हैं उसी दिन अल जज़ीरा जैसे चैनल से राम माधव कहते हैं कि ये तीनों देश फिर एक होंगे और अखंड भारत का सपना पूरा होगा।माधव कहते है कि यह बिना युद्ध के आपसी सहमति से ही होगा।उनका कहना है कि आर एस एस का मानना है कि अखंड भारत का निर्माण अवश्य होगा।
तो क्या सचमुच भारतीय उप महाद्वीप के ये तीनो देश एक इकाई हो जायेंगे ?? क्या इसकी कोई ज़रूरत है? क्या वे ऐतिहासिक कारण शून्य हो जायेंगे जिनके कारण ये विभाजन हुए थे ? और क्या हमें सन् 1947 के अगस्त माह की 15 तारिख की आधी रात से पहले का भारत चाहिए ? या उससे पहले बाबर के समय का हिन्दुस्तान ??
या इससे भी पीछे जायेंगे तो क्या हमें विष्णु पुराण और मार्कंडेय पुराण में वर्णित “आर्यावर्त ” का सपना साकार करना है? या आचार्य चतुरसेन ने “वयं रक्षामः” में त्रेता युग के जिस जम्बूद्वीप का वर्णन किया है वह चाहिए ??
संघ के स्वप्न लोक के इस “अखंड भारत” की कल्पना से पहले यह जानना ज़रूरी है कि आज कश्मीर के क्या हाल हैं ,पूर्वीत्तर के राज्यों के पृथकतावादी आंदोलन ( सशस्त्र संघर्ष भी)किस दशा में हैं ?
अभी के “भारत दैट इज़ इंडिया” में रहने वाले अन्य धर्मों के लोगों को ही अपना मानने को एक पूरी जमात तैयार नहीं है ।तब पाकिस्तान और बांग्लादेश के करोड़ों करोड़ “विधर्मियों”( संघ की नज़र में) को कैसे आत्मसात करेंगे ?
और आज इक्कीसवीं सदी के इस मोड़ पर इस मिथकीय अखंड भारत की ज़रूरत क्या है ? क्या काम करने को इतना बड़ा भारत काफी नहीं है ? क्या सचमुच आपके सपनों का “हिंदू- स्थान” बन कर तैयार हो गया है सो अब ‘अखंड-भारत’ बनाने चले हैं ?? इसी को बना संवार लें तो ये जनम सार्थक हो जायेगा ।
लगता ये है कि आसमानी सुल्तानी वादे कर सत्ता में आया दल और उसकी मातृ-पितृ संस्था अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए ही “अखंड-भारत” जैसे आसमानी ख्वाब दिखा रही है।उन्मादी भीड़ ऐसे नारों और जुमलों को अमली जामा पहनाने को आतुर बैठी ही है ।
अरे भाई भारत-पाक-बांग्ला एक हो गए तो आपको भी तो परेशानी होगी।तब अपने से असहमत या विरोधी को कहाँ पटकने जायेंगे ।अभी तो हर किसी को पाकिस्तान भेज देंते हैं तब हिंदु कुश पर्वत के पार अफगानिस्तान जाना पड़ेगा ना।
छोड़िये ना राम जी।कुछ और करते हैं।