‘व्हाट टू थिंक’ की जगह ‘हाउ टू थिंक’ पर ज़ोर: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति छात्रों को सशक्तव बनाने में महत्वेपूर्ण साबित होगी. राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बारे में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने इस नीति के समग्र कार्यान्वयन पर जोर दिया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन से नई शिक्षा नीति के बारे में और अधिक जानकारी मिलेगी, जिससे इसके बेहतर कार्यान्वयन में मदद मिलेगी. शिक्षा नीति में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था वैश्विक स्तर की होनी चाहिए. उन्‍होंने कहा कि नई शिक्षा नीति नये भारत के निर्माण की नींव रखेगी.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जहां एक ओर छात्रों और युवाओं को वैश्विक स्तर बनाए रखना है, वहीं उन्हें अपनी जड़ों को भी नहीं भूलना है. उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा से छोटे बच्चोंं को लाभ होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्रों पर पाठ्यक्रम का बोझ कम किया जाना चाहिए, क्योंकि ऐसा महसूस किया गया है कि उन पर जानकारी का बोझ बढ़ रहा है. पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्यं एक बेहतर इन्सान तैयार करना है. बेहतर भारत बनाने के लिए तेजी से सुधारों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों को जिज्ञासा और प्रतिबद्धता वाले जीवन के लिए प्रयास करना चाहिए.

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के ज्ञानार्जन पर भी जोर दिया गया है, क्योंकि शिक्षक ही प्रबुद्ध छात्र तैयार करते हैं. उन्होंने नई शिक्षा नीति पर प्रश्नों और संदेहों का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि अब छात्रों को अपना पाठ्यक्रम बदलने की सुविधा होगी और उच्च‍ शिक्षा पर कोई बंधन नहीं होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि जिज्ञासा, चर्चा और विमर्श आधारित शिक्षा पूरी शिक्षा नीति को मजबूत करेगी. उन्होंने इस नीति को तैयार करने में हुए लंबे विचार-विमर्श का भी उल्लेख किया.