ट्रंप के साथ कैसे रह सकते हैं भारत के आर्थिक संबंध

अमेरिका में सत्ता के बदलाव के साथ ही पिछले करीब 8 सालों से चली आ रही नीतियों में भी बदलाव की उम्मीद जतायी जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी भाषणों के दौरान संरक्षणवाद की वकालत की थी और अमेरिकी कंपनियों को विकासशील देशों मे रोजगार ले जाने पर चेताया भी था। अब बदले माहौल में भारत और अमेरिका के आर्थिक संबध क्या आकार ले सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरीकी राष्ट्रपति का पद संभालने के साथ ही, राजनयिक औऱ आर्थिक हलको में उनके नीतियों को लेकर कयास लगाने का सिलसिला जारी है। पिछले सालों में भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते और भी मजबूत हुऐ है और मौजूदा व्यापार 100 अरब डालर के आसपास पहुंच गया है।

काफी पहले से भारत ने भी ट्रंप के कोर टीम के साथ शुरुआती अनौपचारिक बातचीत शुरु कर दी है। ट्रंप ने अपने चुनावी भाषणों मे अमेरिकी कंपनियों को ज्यादा मौके दिये जाने के वादों के साथ ही अमेरिकी कंपनियो के रोजगार के आउटसोर्सिंग को भी कम करने की बात दुहरायी है।

भारतीय आईटी कंपनियों के लिये अमेरिका कंपनियों से बड़ी संख्या में रोजगार के मौके आते हैं, ऐसे में ट्रंप के चुनावी वादे घरेलू कंपनियों को असहज कर सकते हैं। हालांकि आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनी इंफोसिस का मानना है कि ट्रंप सरकार की वास्तविक नीतियों का इंतजार किया जाना चाहिये। कंपनी के प्रमुख विशाल सिक्का ने उम्मीद भी जतायी है कि नयी अमेरिकी सरकार की नीतियां दोस्ताना रहेंगी।

इसके साथ ही भारत औऱ अमेरिका के बीच रक्षा क्षेत्र में प्रगाढ़ होते संबंधों के चलते रक्षा उपकरणो के निर्माण में भी दोनों देशों की कंपनियां हाथ मिला रही है। दुनिया भर में बढ़ते आतंकवाद के बीच इस क्षेत्र में भारत औऱ अमेरिका के बीच आर्थकि गठजोड़ के भी बढ़ने की संभावना है।

भारत औऱ अमेरिका अपने व्यापार को आनेवाले सालों में 500 अरब डालह तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। भारत लगातार अपने दरवाजा विदेशी निवेश के लिये खोल रहा है। अमेरिका की 500 कंपनियों में करीब 10 लाख भारतीय काम करते हैं।

इसके साथ ही करीब 200 भारतीय कंपनियों ने हजारों रोजगार अमेरिका में उपलब्ध कराये हैं। ओबामा प्रशासन ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने को वास्तविक प्राथमिकता दी थी। उम्मीद है ट्रंप के नेतृत्म में नया अमेरिकी प्रशासन भी उन संबंधो को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभायेगा।