पिता की मौत के बाद डूबती कंपनी को करोड़ों के लाभ में पहुंचा दिया
सफलता की इस कहानी को idol-inspiring daughters of Ludhiana नामक अपने पेज पर लुधियाना प्रशासन ने साझा की है। 12 साल पहले पिता की मौत हो गई तो पहले से करोड़ों के कर्ज में डूबी स्प्रिंग कंपनी बंदी की कगार पर पहुंच गई। कर्मचारियों को वेतन मिलना बंद हो गया परिवार को दो जून की रोटी के लाले पड़ गए। लोग ताने मारने लगे कि अब तो कंपनी में ताला ही लगेगा। भला मालिक की 22 साल की यह छोटी लड़की कैसे भारी भरकम कंपनी चला सकेगी। मगर दाद देनी होगी इस बेटी की, जिसने इतनी कम उम्र में पिता की डूबती कंपनी को खुद व कर्मचारियों की मेहनत से न केवल बंद होने से बचाया, बल्कि करोड़ों के लाभ में पहंचा दिया। आज कंपनी का टर्नओवर 20 करोड़ रुपये सालाना है। सफलता की यह कहानी है लुधियाना की युवा उद्यमी संदीप रियात व उनकी कंपनी अकाल स्प्रिंग लिमिटेड की।
यह है सफलता की कहानी
अकाल स्प्रिंग लिमिटेड की एंटरप्रेन्योर संदीप रियात के पिता की 2004 में ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई थी। तब संदीप की उम्र महज 22 साल की थी। तब कंपनी पर 10 करोड़ का कर्ज लदा था। कंपनी की हालत खराब होने लगी। तब संदीप रियात ने कंपनी को इस संकट से उबारने के लिए पूरी तरह से मैदान में उतर पड़ीं। उन्होंने अपने जोशीले भाषण से कंपनी के कर्मियों को बिना वेतन के भी काम करने के लिए राजी कर लिया। कहा कि कंपनी के अच्छे दिन आएंगे तो आपका अहसान कभी नहीं भूलूंगी। कंपनी को लाभ हुआ तो सबको मुनाफा मिलेगा। इस पर सारे कर्मी बगैर वेतन के भी जोशो-खरोश से काम करना शुूरू कर दिए।
 
तीन सौ कर्मचारी कर रहे थे रोटी का संकट
जब अकाल स्प्रिंग लिमिटेड कंपनी बंदी की कगार पर खड़ी हो गई थो काम करने वाले तीन सौ परिवारों को वेतन मिलना बंद हो गया। उनके परिवार की रोटी छिन गई। वे कतराई आंखों से संदीप के आगे गुहार लगाते। यह देख संदीप की आंखों से आंसू बरस पड़ते थे।
कोई नहीं था लोन देने को तैयार, बेटी ने नहीं मानी हार

दस करोड़ का पहले से कर्ज लदा था। चेक बाऊंस होने के 45 मुकदमे कंपनी झेल रही थी। संदीप के पास इतने भी पैसे नहीं थे कि वह हर मुकदमे में पहुंच सके। कोई बैंक सामने नहीं आ रहा था। सब कह रहे थे कि एक लड़की कैसे कंपनी चला पाएगी। मगर एक बैंक ने संदीपकी कंपनी को लोन देने की हामी भर दी। इसके बाद 2006 से 2008 के बीच संदीप ने पूरी टीम के साथ जमकर मेहनत कर कंपनी को घाटे से भारी लाभ में खड़ा कर दिया।