आईएमएफ ने की केंद्र सरकार के नोटबंदी के फैसले की तारीफ

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विमुद्रीकरण के बाद नकदी की कमी के चलते ने देश की आर्थिक गतिविधियों में कुछ अस्थायी रुकावटें आयीं लेकिन इसका असर अब खत्म हो चला है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि उस ऐतिहासिक फैसले का भारतीय अर्थव्यवस्था पर मध्यम अवधि में सकारात्मक असर होगा।

अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ने के संभावनाएं बनी हैं। नोटबंदी की वजह से नकदी की कमी के कारण मुख्य रूप से, शुरूआती तौर पर, निजी उपभोग, लघु उद्योग और आर्थिक गतिविधियों में कुछ अस्थायी बाधाएं पैदा हुईं हैं। आर्थिक गतिविधियों पर सूचना एवं उनकी अधिक औपचारिकता के चलते गैर संगठित क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की मुख्य धारा में लाया जा सका है।

बैंकिंग प्रणाली एवं डिजिटल भुगतान के अधिक प्रयोग से अधिक प्रभावशाली भुगतान प्रणाली के जरिए ऐसा मुमकिन हो सका है। आईएमएफ ने अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत में बड़े आर्थिक सुधारों को लागू किये जाने के बाद आर्थिक विकास दर 8 फीसदी पहुंच सकती है। आईएमएफ जनवरी में भारत के साथ साथ दुनिया के अन्य देशों की विकास दर पर अपने अनुमान जारी करने वाला है।