तत्काल सकल निपटान

तत्काल सकल निपटान अथवा वास्तविक समय सकल भुगतान प्रणाली (अंग्रेजी: Real time gross settlement (RTGS)), या आर टी जी एस एक ऐसी निधि अंतरण पद्धति है जिसमें एक बैंक से दूसरे बैंक में मुद्रा का अंतरण ‘वास्तविक समय’ और ‘सकल’ आधार पर होता है। यह किसी बैंकिंग चैनल द्वारा मुद्रा अंतरण का सबसे तेज माध्यम है। ‘वास्तविक समय’ में भुगतान से तात्पर्य है कि भुगतान लेनदेनों (संव्यवहारों) के लिए कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं होती। जैसे ही कोई लेनदेन प्रसंस्कृत होता है ठीक उसी समय उसका निपटान हो जाता है। ‘सकल भुगतान’ से तात्पर्य लेनदेनों का किसी अन्य लेनदेन जैसे कि बंचिंग या नेटिंग आदि के लिए प्रतीक्षा किए बिना, एक के लिए एक आधार पर निपटान होना है। किसी लेनदेन के प्रसंस्कृत होने के बाद भुगतान अंतिम और अप्रतिसंहरणीय हो जाता है। .

भारतीय रिज़र्व बैंक
भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) भारत का केन्द्रीय बैंक है। यह भारत के सभी बैंकों का संचालक है। रिजर्व बैक भारत की अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करता है। इसकी स्थापना १ अप्रैल सन १९३५ को रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ऐक्ट १९३४ के अनुसार हुई। बाबासाहेब डॉ॰ भीमराव आंबेडकर जी ने भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना में अहम भूमिका निभाई हैं, उनके द्वारा प्रदान किये गए दिशा-निर्देशों या निर्देशक सिद्धांत के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक बनाई गई थी। बैंक कि कार्यपद्धती या काम करने शैली और उसका दृष्टिकोण बाबासाहेब ने हिल्टन यंग कमीशन के सामने रखा था, जब 1926 में ये कमीशन भारत में रॉयल कमीशन ऑन इंडियन करेंसी एंड फिनांस के नाम से आया था तब इसके सभी सदस्यों ने बाबासाहेब ने लिखे हुए ग्रंथ दी प्राब्लम ऑफ दी रुपी – इट्स ओरीजन एंड इट्स सोल्यूशन (रुपया की समस्या – इसके मूल और इसके समाधान) की जोरदार वकालात की, उसकी पृष्टि की। ब्रिटिशों की वैधानिक सभा (लेसिजलेटिव असेम्बली) ने इसे कानून का स्वरूप देते हुए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 का नाम दिया गया। प्रारम्भ में इसका केन्द्रीय कार्यालय कोलकाता में था जो सन १९३७ में मुम्बई आ गया। पहले यह एक निजी बैंक था किन्तु सन १९४९ से यह भारत सरकार का उपक्रम बन गया है। उर्जित पटेल भारतीय रिजर्व बैंक के वर्तमान गवर्नर हैं, जिन्होंने ४ सितम्बर २०१६ को पदभार ग्रहण किया। पूरे भारत में रिज़र्व बैंक के कुल 22 क्षेत्रीय कार्यालय हैं जिनमें से अधिकांश राज्यों की राजधानियों में स्थित हैं। मुद्रा परिचालन एवं काले धन की दोषपूर्ण अर्थव्यवस्था को नियन्त्रित करने के लिये रिज़र्व बैंक ऑफ इण्डिया ने ३१ मार्च २०१४ तक सन् २००५ से पूर्व जारी किये गये सभी सरकारी नोटों को वापस लेने का निर्णय लिया है। .