उ0प्र0 में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिती पर इलाहाबाद न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश

उ0प्र0 में स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिती पर इलाहाबाद न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश & सभी सरकारी अधिकारी अब इन्ही अस्पतालों में अपना इलाज कराएँगे. व्यापक भ्रष्टाचार के लिए CAG द्वारा पूरे स्वस्थ्य व्यवस्था का क्रम्बद्ध तरीके से आडिट कराया जायेगा

१३ फरवरी २००७ को, मुज़फ्फरनगर (उ. प्र.) जिले के पुरकाजी गाँव में स्नेहलता (सलेंता) नाम की गरीब मजदूर महिला केप्रसव पीड़ा शुरू होने पर वह अपनी निकटतम प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र पहुंची, क्यूंकि उन्हें जेएसवाई के बारे में बताया गया था.

  • वहां के एनम ने पैसे लेकर उनका प्रसव कराया, पर लापरवाई के कारण उनके पेशाब की थैली में छेद बन गया और तब सेलगातार पेशाब निकलता गया, जिसे वेसिको-वजयिनल फिस्टुला कहते हैं.
  • इस बीमारी के लिए वह महीनों तक अनगिनत बार सरकारी व नीजी अस्पतालों और अधिकारीयों के पास अपने इलाज के लिए भागती गयी, कुछ नहीं हुआ और परिवार सम्पूर्ण रूप से दिवालिया हो गया.
  • ५-६ माह बाद वह अस्तित्व सामाजिक संस्था और उसके बाद हेल्थ्वाच उ. प्र. के संपर्क मैं आई. काफी कोशिश के बादउनका आप्रेशन और पूरा इलाज एक साल के बाद लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में हो पाया.

उनके केस को ह्यूमन राईट लॉ नेटवर्क के मदद से इलाहबाद उच्च न्यायलय में जन हित याचिका के रूप में दर्ज किया गया (W.P. 14588 of 2009).
हमे अब अदालत से फैसला मिला है:
९ मार्च २०१८ ​के आदेश में, सभी आंकड़ों पर विस्तृत विचार करने के बाद, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची की उत्तर प्रदेश मेंस्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिथि अत्यंत बदतर हालत में हैं, इसके बावजूद की प्रति वर्ष बजट आवंटित किया जाता है. गरीब बीमारजनता लाचार होकर नीजी अस्पतालों में अपना इलाज करने पर मजबूर हैं; पर उनके समस्याओं के प्रति सरकार की ज़िम्मेदारी,जवाबदेही और ईमानदारी का पूरा आभाव स्पष्ट दिख रहा है.

अदालत का मानना है की सरकारी अधिकारी अपना इलाज इस सरकारी व्यवस्था से नहीं कराते हैं, जिस वजह से उन्हें कोईफर्क नहीं पड़ता, इसलिये आदेश है की सभी सरकारी अधिकारी अब इन्ही अस्पतालों में अपना इलाज कराएँगे. व्यापकभ्रष्टाचार के लिए CAG द्वारा पूरे स्वस्थ्य व्यवस्था का क्रम्बद्ध तरीके से आडिट कराया जायेगा.
न्यायालय के आदेश को हम आपके साथ साझा कर रहे है