मौसमों में बेदर्द बरसात के सुख दुख भरे मौसम पर विशेष

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✍ भोलानाथ मिश्र

मारा देश दुनिया से न्यारा है क्योंकि इसमें साल भर में चार तरह के मौसम का आनंद मिलता है और चारों मौसम मिलकर इस धरा को हराभरा आनंदमयी पर्यावरण रक्षक बनाकर जीवन को स्वस्थ प्रसन्नचित एवं आन्नदित कर शरीर में ताजगी बनाये रखता है।

हर मौसम की अपनी खूबी होती है, मसलन गर्मी में लगता है कि तनबदन जलने लगेगा तो जाड़े में लगता है कि शरीर बर्फ हो जायेगा।बरसात का मौसम लगता है कि काले घने बादलों की गड़गडाहट से धरती अम्बर एक कर देगी और आसमान टूटकर जमीन पर आ जायेगा।

चार मौसमों में सबसे प्यारा अंग अंग मदन भरकर मदमस्त करने वाला बसंत का मौसम होता है जिसमें न गर्मी न बरसात और और न ही आसमानी बर्फ ही गिरती है।हमारे सभी मौसम जनजीवन के लाभ एवं कष्टदायक दोनों होते हैं और इनमें जरा सी चूक होने पर बेवक्त मौत तक हो जाती है।

इधर पर्यावरण प्रदूषित हो जाने जलवायु में तेजी से परिवर्तन हो रहा है जिसका असर हमारे मौसमों पर पड़ रहा है। पिछले काफी दिनों बाद इस बार आसमानी बरसाती पानी से नेचुरूल बाढ़ आई है वरना् पिछले कई वर्षों से बाढ़ आने लायक बरसात ही नहीं होती थी।इतनी भी बरसात नहीं होती थी कि गाँव में मनरेगा से खोदवाये गये तालाब भर जाते।

इस साल बहुत दिनों के बाद झमाझम बरसात हो रही है और जबसे धान की रोपाई हो गयी है तबसे कोई खास सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ी है।वैसे तो हमारे यहाँ नछत्रों का क्रम लगातार साल के बाराह महीने चला करता है कि नछत्रों के नामों की पहचान और जानकारी खासोआम को सिर्फ बरसात के मौसम होती है।कहावत भी है कि” बिन मघा के बरसे औ बिन माता के परसे” धरती और मनुष्य का पेट नहीं भरता है।

अगर इसी तरह एक माह बरसात हर रोज या हर दूसरे दिन झमाझम होती रही तो निश्चित तौर पर किसान अपनी फसल से खुश हो जायेगा। हो रही बरसात से जहाँ गरीब अमीर सभी छोटे मध्यम एवं बड़े वर्ग कि किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और उन्हें रबी की फसल की आश बंधी है तो वहीं यहीं बरसात बरबादी का सबब बनकर मौत का तांडव मचा रही है ।

बारिश कहीं वरदान तो कहीं तबाही बनती है और जब तबाही लाती है तो गरीब अमीर सभी किसानों मजदूरों को बेमौत मरने पर मजबूर कर देती है।इस बार बरसाती बाढ़ का प्रलयंकारी प्रकोप अपने आप में अभूतपूर्व माना जा रहा है और देश ही नहीं दुनिया में बाढ़ से तबाही मची है।

अपने देश के विभिन्न राज्यों में सैकड़ों साल बाद ऐसी पहाड़तोड़ बरसात हुयी है जिससे तालाब से लेकर समुद्री तट के राज्यों के तमाम शहर डूब गये है तमाम वाहन जमीदोंज हो गये है और न जाने कितनी जाने इस बेदर्द बरसात की वजह से जा चुकी है और अभी मौत एवं तबाही का तांडव जारी है।जितनी जन धन की तबाही बरसात के मौसम में होती है उतनी अन्य किसी मौसम में नहीं होती है।🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏