पाक जेल में बंद युवक की नागरिकता पर भारत ने लगाई मुहर

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सिवनी@ भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पकड़े गए मध्य प्रदेश के सिवनी निवासी जितेंद्र अर्जुनवार (22) की नागरिकता पर विदेश मंत्रालय ने मुहर लगा दी है। नागरिकता पर मुहर के बाद पांच साल से पाकिस्तान की जेल में बंद जितेंद्र के जल्द स्वदेश लौटने की उम्मीद जताई जा रही है। अगस्त 2013 में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जितेंद्र को पाक रेंजरों ने पकड़ा था। घर से भागकर जितेंद्र महीनों तक भटकने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंच गया था।

सिवनी के एसपी तरुण नायक ने बताया कि पाकिस्तान की जेल में बंद सिवनी जिले के बरघाट के रहने वाले युवक जितेंद्र अर्जुनवार के भारतीय नागरिकता संबंधी दस्तावेज कुछ महीने पहले विदेश मंत्रालय को भेजे गए थे। इनमें कुछ कमियां देखते हुए मंत्रालय ने फिर से जरूरी दस्तावेज मांगे थे। प्राप्त निर्देशों के तहत बीते बुधवार को गृह और विदेश मंत्रालय को दस्तावेज भेज दिए गए हैं। एसपी नायक ने बताया कि पाकिस्तानी जेल में बंद जितेंद्र की रिहाई के लिए विदेश मंत्रालय और भारत सरकार प्रयासरत है। वे स्वयं भी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से संपर्क बनाए हुए हैं।

नागरिकता की पुष्टि होने के बाद बरघाट में जन्मे, पले-बढ़े जितेंद्र की पाकिस्तान जेल से जल्द रिहाई हो सकती है। बरघाट में मैकेनिक का काम करने वाले जितेंद्र के भाई भरत ने बताया कि उसे और उसके परिवार वालों को बरघाट पुलिस थाने पर दस्तावेजों की पुष्टि के लिए बुलाया गया था। परिवार वालों ने पहले ही जितेंद्र के नाम के सबूत के तौर पर वोटर और राशन कार्ड जमा करवा दिए हैं। जैसा कि आप को बता दें आबिद हुसैन ने इस मुहिम को ट्विटर के माध्यम से हेल्प जीतेन्द्र नाम से चलायी थी यह मुहिम आज इस नतीजे पर पहुंची है के जीतेन्द्र अर्जुनवार अपने वतन हिंदुस्तान आरहा है ।आबिद हुसैन ट्विटर को एक अच्छा माध्यम मानते हैं आबिद इसके पहले कई मामलों के लिए कई मुहिम चला चुके हैं

गौरतलब है कि 12 अगस्त 2013 को भारत-पाकिस्तान के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा के खोखलापार में जितेंद्र को पाक रेंजर्स ने पकड़ा था। घर से भागकर जितेंद्र भारत में महीनों भटकने के बाद भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहुंच गया था। जितेंद्र एनीमिया की बीमारी से पीड़ित है। पाकिस्तान की जेल में जितेंद्र का इलाज किया जा रहा है। वह कराची जिले के मलिर सर्किल जेल में बंद है। जितेंद्र ठीक से चल नहीं पा रहा है और उसे बैसाखी का सहारा लेना पड़ता है।