9/11 हमले के शांति समझौता का गवाह बनेगा भारत

नई दिल्ली :आज से 19 साल पहले साल पहले यानी 11 सितंबर 2001 को आतंकवादियों ने दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका पर एक ऐसा हमला किया था, जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया था | उस हमले ने ऐसी तबाही मचाई थी कि उस मंजर को देखने वाले कभी भूल नहीं सकते |आतंकियों ने हवाई जहाज को मिसाइल के रूप में इस्तेमाल किया था | इस हमले में पल भर में तीन हजार से अधिक सैनिक मारे गए थे |

दरअसल, 11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमेरिका पर आतंकी संगठन अल-क़ायदा ने जो हमला किया था, वह आत्मघाती हमलों की श्रृंखला थी | उस दिन सवेरे, 19 अल कायदा आतंकवादियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था |

बता दें कि अपहरणकर्ताओं ने जानबूझकर उनमें से दो विमानों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, न्यूयॉर्क शहर के ट्विन टावर्स के साथ टकरा दिया, जिससे विमानों पर सवार सभी लोग तथा भवनों के अंदर काम करने वाले अन्य अनेक लोग भी मारे गए थे | जिससे २ घंटे के अंदर बड़ी बड़ी इमारतें ढह गयी | यहां तक कि उनके पास वाली इमारतें भी तबाह हो गईं थी और दूसरी इमारतों को भारी नुकसान हुआ था | इतना ही नहीं अपहरणकर्ताओं ने तीसरे विमान को भी वाशिंगटन डी.सी. के बाहर आर्लिंगटन, वर्जीनिया में पेंटागन से टकरा दिया था |

यह हमला कितना बड़ा था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस हमले में लगी आग को बुझाने में लगभग 100 दिन का समय लगा था | इस हमले में ट्विन टावर में 90 से ज्यादा देशों के नागरिक मारे गए थे |

19 साल बाद आज अफगानिस्तान में अमेरिका और तालिबान के बीच एक अहम शांति समझौता होने जा रहा है | इस समझौते की खास बात यह है कि यह पहला मौका होगा जब भारत तालिबान से जुड़े किसी मामले में आधिकारिक तौर पर शामिल होगा | अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर से एक दिन पहले विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला शुक्रवार को काबुल पहुंचे और शांतिपूर्ण व स्थिर अफगानिस्तान के लिए भारत का निर्बाध समर्थन व्यक्त किया | विदेश सचिव ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री हारून चाखनसुरी से बातचीत की और इस दौरान उन्हें शांति समझौते को लेकर भारत के नजरिये के साथ ही उसके चहुंमुखी विकास को लेकर उसकी प्रतिबद्धता की भी जानकारी दी |

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि श्रृंगला और हारून ने द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा की और सकारात्मक रूप से गतिविधियों का आकलन किया | दोहा में आज अमेरिका और तालिबान के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होंगे जिससे इस देश में तैनाती के करीब 18 साल बाद अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ होगा | कुमार ने ट्वीट किया, ‘विदेश सचिव ने सतत शांति, सुरक्षा और विकास की अफगानिस्तान के लोगों की कोशिशों में भारत का पूर्ण समर्थन व्यक्त किया |’

अफगानिस्तान में शांति और सुलह प्रक्रिया का भारत एक अहम पक्षकार है | कतर में भारत के राजदूत पी कुमारन उस समारोह में हिस्सा लेंगे जिसमें अमेरिका और तालिबान शांति समझौते पर दस्तखत करेंगे | एक महत्वपूर्ण कदम के तहत भारत ने मास्को में नवंबर 2018 में हुई अफगान शांति प्रक्रिया में “गैर आधिकारिक” क्षमता में दो पूर्व राजनयिकों को भेजा था | इस सम्मेलन का आयोजन रूस द्वारा किया गया था जिसमें तालिबान का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल, अफगानिस्तान, अमेरिका, पाकिस्तान और चीन समेत समेत कई अन्य देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे | शांति समझौते से पहले भारत ने अमेरिका को यह बता दिया है कि वह पाकिस्तान पर उसकी जमीन से चल रहे आतंकी नेटवर्कों को बंद करने के लिये दबाव डालता रहे यद्यपि अफगानिस्तान में शांति के लिये उसका सहयोग महत्वपूर्ण है |