पक्षकारों को सस्ता एवं शुलभ न्याय दिलाने की पहल – औहरिया

भिण्ड @ जिला एवं सत्र न्यायाधीश मा. भारत सिंह औहरिया ने कहा है कि पक्षकारो को सस्ता एवं शुलभ न्याय दिलाने में नेशनल लोक अदालत की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस लोक अदालत के लिए गठित की गई खण्डपीठो के माध्यम से विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण आपसी सुलह एवं समझौता के आधार पर करने की पहल की गई है। वे आज नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ मॉ सरस्वती जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलित कर एडीआर भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार गुप्ता, प्रधान न्यायाधीश कुटुम न्यायालय संजीव अग्रवाल, बार एशोसिएशन के अध्यक्ष उल्फत सिंह चौहान, प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश उमेश पाण्डव, द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन, तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनराज दुबेला, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पवन कुमार बांदिल, पंचम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मो. शकील खांन, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी जितेन्द्र कुमार बाजोलिया, चतुर्थ व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो विकास शुक्ला, द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो ज्ञानेन्द्र शुक्ल, तृतीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग दो शरद जायसवाल, ट्रेनी जज सोनू जैन, जिला विधिक सहायता अधिकारी संजय जैन, उपायुक्त सहकारिता बबलू सतनकर, महाप्रबंधक जिला सहकारी बैंक पीके राठौर, अभिभाषकगण, अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी, न्यायालयीन कर्मचारीगण उपस्थित थे।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश मा.भारत सिंह औहरिया ने कहा कि इस वर्ष की प्रथम नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत होने वाले प्रकरण में विवाद समाप्त होता है। साथ ही सकारात्मक सोच के साथ अन्तर आत्मा से सुलह एवं समझौते का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है, जहां पर प्रकरणों के निराकरण में मनमुटाव एवं कटुता समाप्त होती है। साथ ही राजीनामा के आधार पर प्रकरणों का निराकरण आसानी से किया जाता है। लोक अदालत में निराकृत किए गए प्रकरणों की अपील नहीं होती है। इसीप्रकार गठित खण्डपीठ के माध्यम से अधिक से अधिक पक्षकार लाभान्वित होते है। डीजे मा. भारत सिंह औहरिया ने जिला मुख्यालय पर गठित की गई खण्डपीठो का निरीक्षण कर, प्रकरणों के निराकरण की स्थिति का अवलोकन किया।

प्रधान न्यायाधीश कुटुम न्यायालय संजीव अग्रवाल ने कहा कि चालू वर्ष में प्रथम नेशनल लोक अदालत का आयोजन विभिन्न खण्डपीठो के माध्यम से किया गया है। इन खण्डपीठो के माध्यम से पीठासीन अधिकारी पक्षकारो के राजीनामा योग्य प्रकरणों का निराकरण कर सस्ता एवं शुलभ न्याय प्रदान का अवसर प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि कुटुम न्यायालय में प्रचलित प्रकरण भी नेशनल लोक अदालत के माध्यम से निराकृत किए जा रहे है। जिनमें अधिक से अधिक राजीनामा का प्रयास किया गया हैं।

बार एशोसिएशन के अध्यक्ष उल्फत सिंह चौहान ने कहा कि नेशनल लोक अदालत के माध्यम से आपसी सुलह एवं समझौता के आधार पर प्रकरणों के निराकरणो का अवसर प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि पक्षकार का प्रकरण आसानी से निराकरण करने में नेशनल लोक अदालत एक महत्वपूर्ण कडी है। जिसके माध्यम से पक्षकार के दिल और दिमाक को जीतकर उसके प्रकरण का निराकरण आसानी से किया जाता है।

द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. कुलदीप जैन ने कार्यक्रम विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नेशनल लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की जा रही है। नेशनल लोक अदालत में प्रकरण के निराकरण से आपसी बेमनुष्यता समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में पारित आदेश की अपील नहीं होती है। साथ ही भाई चारे के साथ सभी प्रकार के प्रकरणों को निराकृत करने का अवसर मिलता है। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सहायता अधिकारी संजय जैन ने किया। अंत में ट्रेनी जज सोनू जैन ने सभी के प्रति आभार प्रदर्शित किया।

नेशनल लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण
नेशनल लोक अदालत में आपराधिक, दीवानी, विद्युत अधिनियम, श्रम, मोटर दुर्घटना दावा, प्रिलिटिगेशन, निगोशिएबल इंस्टूमेन्ट एक्ट के अन्तर्गत चैक बाउन्स प्रकरण, कुटुम्ब न्यायालय, ग्राम न्यायालय, राजस्व न्यायालय, उपभोक्ता फोरम, प्लीबारगेंनिंग, विड्रावल क्रिमीनल केसेस (एफ.आर), सहकारिता प्रकरण, क्रिमिनल समरी, विद्युत चोरी के प्रकरण, लीगल सर्विसेस मैटर्स एवं शिक्षा, स्वास्थ्य, वन तथा अन्य शासकीय विभागों के प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की गई। इसीप्रकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135, 138 एवं 126 के अन्तर्गत न्यायालयों में लंबित प्रकरणों में निम्न दाव श्रेणी के समस्त घरेलू, समस्त कृषि, 5 किलो वाट भार तक के गैर घरेलू 10 अश्वशक्ति भार तक के औद्योगिक उपभोक्ताओं के प्रकरणों में छूट प्रदाय की गई।

नेशनल लोक अदालत में आपसी सुलह और समझौता के आधार पर सम्पत्तिकर अधिभार की राशि जलकर के प्रकरणों का भी निराकरण करने की पहल की गई है। साथ ही सम्पत्तिकर अधिभार और जल उपभोक्ता प्रभार में छूट प्रदान करने के प्रकरणों का निराकरण किया गया। आयोजित की गई नेशनल लोक अदालत के अन्तर्गत जिला मुख्यालय के न्यायालयों के अलावा न्यायिक तहसील मेंहगाव, गोहद, लहार पर भी न्यायाधीशो की गठित खण्डपीठो के माध्यम से अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण करने की पहल की है।