ईरान ने अमेरिकी सेना को आतंकी घोषित किया

ईरान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिकी सेना को आतंकवादी घोषित कर दिया, वहीं संसद ने कुद्स फोर्स के लिए 244 मिलियन अमेरिकी डॉलर के और बजट की घोषणा की है।

अमेरिकी हमले में मारे गए ईरानी सैन्य जनरल कासिम सुलेमानी के गृहनगर करमान में सुलेमानी के शव को सुपुर्द ए खाक किया गया, इस मौके पर हजारों की संख्या में उनके समर्थकों के बीच हुई भगदड़ में 35 लोग मारे गए और कई घायल हो गए। करमान में सुलेमानी के जनाजे में उतनी ही भीड़ देखी गई जितनी ईरानी शहर तेहरान, कोम, मशद और अहवाज में थी।

वहीं ईरान की संसद ने एक प्रस्ताव पारित कर अमेरिकी सेना को आतंकवादी घोषित कर दिया, वहीं संसद ने कुद्स फोर्स के लिए 244 मिलिअन अमेरिकी डॉलर के और बजट की घोषणा की है। जनरल कासिम सुलेमानी को ही दरअसल कुद्स फोर्स खड़ी करने के लिए जाना जाता है। इस सबके बीच अमेरिकी रक्षामंत्री मार्क एस्पर ने उन सभी मीडिया रिपेर्ट्स का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि अमेरिकी सेना ईराक से वापस हो सकती है, एस्पर ने कहा कि ईराक से सेना हटाने की कोई योजना नहीं है।

दरअसल मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि अमेरिकी सेना हैलीकॉप्टर के जरिये अपनी सेना को बगदाद से हटाने जा रही है। एस्पर ने कहा कि ये रिपोर्ट गलत है। आपको बता दें कि ईराक में अमेरिका के लगभग 5000 सैनिक मौजूद हैं। बगदाद में अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है।

अमेरिकी हमले में जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से अंतर्राष्ट्रीय जगत भी चिंतित है। जर्मनी ने कहा कि वो ईराक में आईएस का मुकाबला करने के लिए भेजे गए अपने कुछ सैनिकों को वापस बुला रहा है, तो वहीं संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने विश्व नेताओं से इलाके में तनाव कम करने, संयम बरतने और बातचीत की अपील की है।

नाटो प्रमउक जेन स्टोल्टेनबर्ग ने ईरान को चेतावनी दी है कि वो जिंसा छोड़े , ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और ईटली के विदेश मंत्री भी इस मुद्दे पर एक आकस्मिक बैठक कर रहे हैं। यूरोपियन यूनियन के विदेश मंत्री भी इस समस्या पर शुक्रवार को एक बैठक करेंगे, यूनियन का कहना है कि संयम बरतने में ही ईराक और ईरान का भला है तो वहीं चीन ने भी इलाके में संयम और तनाव कम करने की अपील की है।

इस बीच कच्चे तेल के दामों में मामुली सुधार से वैश्विक बाजारों में भी ज्यादा अंतर नहीं है, बाजार अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। कुल मिलाकर सबकी नजरें ईरान और अमेरिका के अगले कदमों पर लगी हुई है।