शादी में फिजूलखर्ची को रोकने के लिए J&K सरकार लाई बिल

जम्मू कश्मीर। शादियों का ध्यान में आते ही याद आता है पकवान ,लाईट, और सज़ा धज़ा पंडाल। जितनी तड़क भड़क शादी में हो उतना ही रुतबा ऊँचा भी माना जाता है कई बार ऐसा देखने को भी मिलता है कि समाज में अपने रसुख के लिए परिवार कर्ज़ लेकर भी शादियां करते है और फिर ये तड़क भड़क उनके लिए बाद में जी का जंजाल भी बन जाती है लेकिन अब जम्मू कश्मीर सरकार इस कुप्रथा के लिए एक बिल लेकर आई है।

बिल के अनुसार शादियो में अधिकतम 500 लोगों को ही बुलाया जा सकेगा तो छोटे कार्यक्रमों में 100 से अधिक लोगों की उपस्थिती नहीं होगी। खाने में सात से अधिक पकवान नहीं हो सकेगें तो दो स्टाल मीठे या फल के ही हो सकेगें। वही बिल के अनुसार शादी के कार्ड के साथ ड्राई प्रुट या मिठाई देने में पाबंदी लगा दी गई है। वहीं शादियों में फिजुलखर्ची को रोकने के लिए लाऊडस्पीकर और पटाखों के इस्तेमाल पर भी पांबंदी लगा दी गई है। जम्मू कश्मीर सरकार इस बिल को एक अप्रैल से लागू करने जा रही है।

लोकसभा में भी इस कुप्रथा को रोकने की गुँज सुनाई दी। कांग्रेस सांसद रणजीता रंजन ने लोकसभा में प्राईवेट मेंबर बिल के तौर पर शादियों में फिजुलखर्ची को रोकने के लिए एक बिल लाई। बिल के अनुसार अगर शादियों में खर्च पाँच लाख से ज्यादा होता है तो 10 फीसदी को योगदान गरीब लड़कियों के विवाह मे देना होगा । हांलाकि ये बिल अभी लंबित है । हालांकि आमजन भी अब चाहने लगे है कि शादियों की फिजूलखर्ची मे कमी आए । फिजूलखर्ची में रोक के लिए लोगों और सरकारों को मिलकर काम करना होगा तभी इस पर लगाम लग पाएगी।

असल में शादियों में फिजूलखर्ची एक कुप्रथा है और इसके खिलाफ सभी को लामबंद होने की जरुरत है ताकि दिखावे के रुतबे के चलते परिवारो को कर्ज़ के बोझ तले दबने से बचाया जा सके और गरीब परिवारो के लिए शादियां एक बोझ नही बल्कि हर्ष का मौका बन सके।