हरियाणा में जाट आरक्षण पर जारी रहेगी रोक

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हरियाणा में जाट आरक्षण पर जारी रहेगी रोक, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला, राष्ट्रीय पिछडा आयोग की ओर से मार्च 2018 में हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपने के बाद होगा आगे का फैसला।

जाट आरक्षण पर जारी रोक को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने फिलहाल बरकरार रखा है। जस्टिस एसएस सरो और लीजा गिल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए जाट सहित छह जातियों को पिछड़ी वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण पर रोक जारी रखा। इससे पहले अदालत ने कोर्ट इस मामले पर इसी साल 6 मार्च को सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था।

दरअसल कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर जाट सहित छह जातियों को पिछड़ा वर्ग के तहत दिए गए आरक्षण पर रोक लगाने की मांग की थी। हरियाणा सरकार ने जाट सहित छह जातियों को विशेष पिछड़ा मानते हुए पिछड़ा वर्ग के तहत दस प्रतिशत आरक्षण दे दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग के पास 31 दिसम्बर तक जाट आरक्षण के हक में अपनी आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।

अदालत ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को आंकड़े इकठ्ठा करने और अगले साल 31 मार्च 2018 तक रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया। इसके बाद इस पर फ़ैसला लिया जायेगा। जाट आरक्षण के मामले पर अदालत में याचिकाकर्ता ने एक आंकड़ा प्रस्तुत करते हुए कहा था कि हरियाणा में सरकारी नौकरियों और अन्य जगहों पर जाट पहले से ही काफी संख्या में हैं और जाट समाज के लोग आर्थिक रूप से पिछड़े नहीं हैं। इसीलिए जाटों को आरक्षण के लाभ की जरूरत नहीं है।

याचिकाकर्ता के आंकड़े को अदालत में हरियाणा सरकार ने गलत बताते हुए कहा था कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई सर्वेक्षण ही नहीं कराया गया है जिससे ऐसा कुछ तय हो सके। जाटों ने आरक्षण की माँग को लेकर हरियाणा में आंदोलन छेड़ रखा है। पिछले साल फरवरी में हुए जाट आंदोलन में 28 लोग मारे गए थे और करीब. 2100 लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज हुए थे।