काश! देश में हर गरीब को ऐसा घर मिल पाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा गोद लिए गए गांव जयापुर में 14 गरीब परिवारों के लिए बनाया गया अटल नगर एक उदाहरण है.
बनारस के जयापुर गांव में सात टोले हैं. मोटे तौर पर ये टोले जातियों के आधार पर बंटे हैं. इन्हीं टोलों में से एक है मुसहर टोला. हाल तक इस टोले के 14 परिवारों के पास कोई मकान नहीं था. झुग्गियों में ही उनकी दुनिया बसती थी. लेकिन जयापुर से नरेंद्र मोदी के जुड़ने के बाद इन 14 परिवारों के दिन कम से कम आवास के मामले में बदले हैं. इन परिवारों के लिए एक कॉलोनी विकसित की गई है. इसे नाम दिया गया है ‘मोदी जी का अटल नगर’.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श योजना के तहत जयापुर को गोद लिया है. यहां की ग्राम प्रधान दुर्गावती पटेल बताती हैं, ‘यह अटल नगर सरकारी पैसे से नहीं बना है. मुंबई की अलाना संस प्राइवेट लिमिटेड ने कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी यानी सीएसआर फंड के तहत इसे विकसित किया है.’ इस अटल नगर में 14 मकान बने हैं. हर मकान में 120 वर्ग फुट का एक कमरा है. तकरीबन इसी आकार का एक आंगन है. रसोई, बाथरूम और शौचालय भी हर मकान में हैं. कमरे में पंखा लगा है. इन परिवारों को बिस्तर भी दिए गए हैं. इसके अलावा हर घर की छत पर सोलर प्लेट है जिससे इन परिवारों की ऊर्जा की जरूरतें पूरी होती हैं. छतों पर पानी की टंकी भी दिखती है.

अटल नगर के हर घर के सामने तकरीबन दस फुट चौड़ी सीमेंट की सड़क है. सड़क के पार तरह-तरह के खूबसूरत फूलों की क्यारियां हैं.

अटल नगर के हर घर के सामने तकरीबन दस फुट चौड़ी सीमेंट की सड़क है. सड़क के पार तकरीबन 25—30 फुट की एक पट्टी है जिस पर तरह—तरह के खूबसूरत फूलों की क्यारियां हैं. फूलों की क्यारियों के बाद शबरी माता का एक मंदिर है. शबरी माता के बारे में मुसहर परिवारों के लोग मानते हैं कि वे लोगों की हर मुराद पूरी कर सकती हैं.
ये घर इनमें रहने वालों को किसी वरदान से कम नहीं लगते. यह स्वाभाविक भी है. जिनकी जिंदगी झुग्गियों में गुजरी हो उनके लिए सबसे बड़ा सपना पक्का मकान होता है. इन घरों और इनमें रहने वाले लोगों को इस वजह से मिली खुशी देखकर ऐसा लगता है कि काश! ऐसा घर देश के हर गरीब को मिल पाता.
ये घर जुलाई, 2015 में इन 14 परिवारों को सौंपे गए थे. तकरीबन छह महीने बाद भी इस अटल नगर में गंदगी का नामोनिशान नहीं दिखता. लोगों को अगर एक बार कोई अच्छी चीज बनाकर दी गई तो वे उसकी देखरेख में जी-जान लगाए हुए हैं. जब हम अटल नगर पहुंचे तो 65 साल के एक बुजुर्ग मंगई फूलों की क्यारियों की साफ-सफाई में लगे हुए थे. उन्होंने बताया, ‘मोदी जी की पहल से हम लोगों को एक बार तो बढ़िया घर और कॉलोनी मिल गया लेकिन, अगर हम खुद इसकी देखरेख नहीं करेंगे तो मोदी जी क्या करेंगे.’ साफ है कि लोगों को खुद सार्वजनिक जगहों की सफाई की चिंता है.

‘मोदी जी की पहल से हम लोगों को एक बार तो बढ़िया घर और कॉलोनी मिल गया लेकिन, अगर हम खुद इसकी देखरेख नहीं करेंगे तो मोदी जी क्या करेंगे.’

हालांकि अटल नगर के लोग अब भी खाना चूल्हे पर ही बनाते हैं. रसोई गैस और गैस चूल्हे का इस्तेमाल यहां अभी नहीं हो रहा है. पारंपरिक चूल्हे पर खाना बनाने की प्रक्रिया में जो धुआं निकलता है, उससे घर गंदा होता है. इसलिए इन सभी 14 घरों की महिलाएं घर में खाना ही नहीं बनातीं बल्कि यह काम घर के बाहर करती हैं. ग्राम प्रधान दुर्गावती पटेल बताती हैं, ‘हमसे किसी ने संपर्क करके कहा है कि वे इन 14 परिवारों के लिए गैस सिलिंडर और गैस चूल्हा देना चाहते हैं. मुझे उम्मीद है कि एक महीने के अंदर हम इन परिवारों के लिए यह व्यवस्था भी कर देंगे.’
अटल नगर में रहने वाली बुजुर्ग महिला गायत्री बनबासी कहती हैं, ‘हमारी जिंदगी तो झुग्गियों में गुजर गई लेकिन अब ऐसा घर मिल गया है तो हमारे घर के बच्चों की जिंदगी हमारे मुकाबले थोड़ी आसान हो जाएगी. उन्हें यह भी उम्मीद है कि इन अच्छों घरों का अच्छा असर उनके यहां के बच्चों के भविष्य पर भी पड़ेगा.’
हालांकि ऐसा भी नहीं हैं कि इन चमकते पीले मकानों ने इन 14 परिवारों की सारी समस्याएं सुलझा दी हैं. अटल नगर को मुख्य जयापुर से जोड़ने वाली सड़क कच्ची और पतली है. दिसंबर के महीने में तो मिट्टी की इस सड़क से होते हुए गाड़ी यहां तक पहुंच गई लेकिन अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि बरसात के मौसम में ऐसा नहीं हो सकता. मंगई बताते हैं, ‘बरसात में कच्ची सड़क होने की वजह से काफी दिक्कत होती है. हमारे यहां के छोटे बच्चे भी स्कूल जाते हैं. उन्हें स्कूल जाने में दिक्कत होती है. हमें मकान तो मोदी जी की वजह से मिल गया अब अगर सड़क भी बन जाती तो बहुत अच्छा होता.’

हालांकि ऐसा भी नहीं हैं कि इन चमकते पीले मकानों ने इन 14 परिवारों की सारी समस्याएं सुलझा दी हैं. सड़क से लेकर स्वास्थ्य तक कई मोर्चों पर हालत अब भी पहले जैसी है.

गायत्री के लिए सबसे बड़ी समस्या स्वास्थ्य की है. वे कहती हैं, ‘अगर कोई यहां बीमार पड़ता है तो झोला छाप डॉक्टरों से इलाज कराने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है. वे कहती हैं कि ये पैसे भी ले लेते हैं और कई बार इनकी दवाओं से कोई फायदा भी नहीं होता.’
पक्के मकानों के बावजूद जयापुर के अटल नगर में रहने वाले लोगों में एक जातिगत असुरक्षा अभी भी दिखती है. यहां रहने वाले सभी परिवार मुसहर जाति से हैं. जिस दिन हम अटल नगर पहुंचे उसके अगले दिन यहां ग्राम प्रधान के लिए चुनाव होना था. चुनाव की चर्चा छेड़ने पर एक साथ कई महिलाएं बोल पड़ीं कि वे लोग किसी के दबाव में वोट नहीं देना चाहते, लेकिन उन पर कुछ लोग आकर दबाव बनाते हैं कि फलां उम्मीदवार को ही वोट देना. वे महिलाएं यह भी जोड़ती हैं कि चाहे जो भी हो, लेकिन इस बार वोट तो वे अपने मन से ही देंगी.
इस लिहाज से यह बात जयापुर से नरेंद्र मोदी का नाम जुड़ने के बाद यहां पिछड़ी जाति के लोगों में आए आत्मविश्वास को भी दिखाती है. जयापुर से नरेंद्र मोदी का नाम जुड़ने के बाद इस गांव में दबंगई दिखाने वाली जातियों में एक तरह का भय भी पैदा हुआ है. मोदी का नाम यहां से जुड़ने से अक्सर कोई न कोई इस गांव में आता रहता है. प्रशासनिक अधिकारियों, नेताओं और पत्रकारों के अक्सर यहां आने से दबंगई करने वालों के मन में यह भय पैदा हुआ है कि वे अगर गलत करेंगे तो कभी भी फंस सकते हैं.