JNU के प्रोग्राम में पीएम मोदी ने कहा- विचारधारा की संकीर्णता लोकतंत्र और राष्ट्रहित के लिए घातक

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को यहां जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का वर्चुअल माध्यम से अनावरण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि विचारधारा की संकीर्णता लोकतंत्र और राष्ट्रहित के लिए घातक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के राजनीतिक दलों और बुद्धिजीवियों का आह्वान किया कि वह विचारधारा के संकुचित दायरे से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हितों पर विचार करें। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति और संगठन की विचारधारा होती है लेकिन राष्ट्रीय हितों का तकाजा है कि हम इससे ऊपर उठकर देश और देशवासियों के हितों की चिंता करें।

प्रधानमंत्री ने देश में विचारधारा के आधार पर राजनीतिक वैमनस्यता और राजनीतिक अस्पृश्यता का हवाला देते हुए वर्ष 1975 के आपातकाल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय परस्पर विरोधी विचारधारा वाले राजनीतिक दल और कार्यकर्ता लोकतंत्र को बचाने के लिए एकजुट हो गए थे। उन्होंने कहा कि आपातकाल के खिलाफ संघर्ष में देश ने विचारधारा से ऊपर उठकर राजनीतिक एकजुटता का प्रदर्शन किया था। लोकतंत्र बचाने की मुहिम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक और भारतीय जनसंघ के कार्यकर्ता शामिल थे। समाजवादी लोगों और कम्युनिस्टों ने भी इसमें भागीदारी की थी।

मोदी ने कहा कि देश में आपातकाल जैसा कठिन समय आने पर हर विचारधारा के लोग राष्ट्रहित में एक साथ आए हैं। हमें यह परंपरा आजादी की लड़ाई से मिली, जब हर विचारधारा के लोगों ने देश को स्वतंत्र कराने के लिए महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वाधीनता आंदोलन में भाग लिया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति और संगठन अपनी विचारधारा पर गर्व करता है। यह स्वाभाविक है लेकिन हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमारी विचारधारा का राष्ट्रीय हितों से कोई विरोध न हो। विचारधारा राष्ट्रहित के अनुकूल होनी चाहिए। राष्ट्रहित के खिलाफ नहीं।

मोदी ने कहा कि विचारधारा के संकुचित दायरे में रहने के कारण देश की लोकतांत्रिक प्रणाली का बहुत नुकसान हुआ है। राष्ट्रहित से अधिक अपनी विचारधारा को महत्व देना लोकतंत्र के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि विचारधारा के कारण लोग और संगठन एक निश्चित सांचे में सोचने लगते हैं तथा उसी के अनुरूप राष्ट्रहितों की व्याख्या करने लगते हैं। यह उचित नहीं है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी कामना है कि जेएनयू में लगी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा सभी को प्रेरित करे और उनमें ऊर्जा भरे। यह प्रतिमा स्वामी विवेकानंद की ओर से देखे गए प्रत्येक व्यक्ति में वीरता और साहस की भावना भरे। यह प्रतिमा लोगों को स्वामी जी के दर्शन का मुख्य आधार करुणाभाव और सामंजस्य सिखाए।

उन्होंने कहा कि आज देश आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। आज आत्मनिर्भर भारत का विचार 130 करोड़ से अधिक भारतीयों का सामूहिक चेतना और आकांक्षाओं का हिस्सा बन गया है। देश का युवा दुनिया में ब्रांड इंडिया का ब्रांड एंबेसडर हैं।

हमारे युवा भारत की संस्कृति और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। आपकी उम्मीद सिर्फ हज़ारों सालों से चली आ रही भारत की पहचान पर गर्व करने भर की ही नहीं है, बल्कि 21वीं सदी में भारत की नई पहचान गढ़ने की भी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में लंबे समय तक गरीब को सिर्फ नारों में ही रखा गया लेकिन देश के गरीब को कभी सिस्टम से जोड़ने की चेष्टा ही नहीं हुई।

सबसे ज्यादा उपेक्षित और वित्तीय समावेशन से दूर गरीब ही रहा। अब गरीबों को अपना पक्का घर, टॉयलेट, बिजली, रसोई गैस, पीने का साफ पानी, डिजिटल बैंकिंग, सस्ती मोबाइल कनेक्टिविटी और तेज़ इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा मिल रही है। यह गरीबों की आकांक्षाओं को उड़ान देने के लिए बुना गया सुरक्षा कवच है और यह बेहद जरूरी भी है।