मछलियों पर रसायन के छिड़काव का पता लगाने के लिए किट

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केंद्र सरकार ने एक ऐसी किट जारी की है जिसके जरिए आसानी से मछलियों में रसायनिक मिलावट या छिड़काव का पता चल जाएगा। केंद्रीय केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह ने सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नालॉजी (सीआईएफटी) कोच्चि द्वारा विकसित मछलियों में रसायनिक मिलावट या छिड़काव का पता लगाने वाली किट – त्वरित परीक्षण किट (सिफ्टेस्टम) को जारी की।

मछलियों को जल्दी खराब होने से रोकने और बर्फ में फिसलन खत्म करने के लिए अमोनिया तथा फॉर्मेल्डाहाइड का इस्तेमाल किया जाता है। इस किट के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि मछली पर रसायनिक छिड़काव हुआ है अथवा नहीं।इस अवसर पर कृषि मंत्री ने कहा कि अमोनिया तथा अन्य रसायनिक पदार्थ के सेवन से मनुष्यों में अनेक स्वास्थ्य संबंधी समस्यायें जैसे, पेट दर्द, वमन, बेहोशी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं और यहां तक कि व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

मछलियां जल्दी खराब हो जाती हैं | इसलिए उनका लंबे समय तक भंडारण नहीं किया जा सकता है। भारतीय घरेलू बाज़ार में फॉर्मेल्डहाइड तथा अमोनिया युक्त मछली के बिक्री की सूचनाएं अक्सर मिलती हैं। विशेषत: उन बाज़ारों में जो उत्पा‍दन केंद्रों से दूरदराज स्थानों में स्थित हैं।

इन पहलुओं को ध्यान में रखकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अमोनिया तथा फॉर्मेल्डहाइड की त्वरित जांच हेतु परीक्षण किटों को विकसित किया है। इन किटों का प्रयोग उपभोक्ता सरल तरीकों से कर सकता है। किट के भीतर कागज़ की पट्टियां, द्रव्य तथा परिणाम जानने के लिए एक मानक चार्ट दिया गया है।