जानिए लाइफ़ इंश्योरेंस क्लेम दर्ज़ करने संबंधी ज़रूरी बातें जो सभी को पता होनी चाहिए
इस ख़बर को शेयर करें

हर कोई जानता है कि पॉलिसी कवर के दौरान इंश्योर्ड व्यक्ति की मृत्यु होने पर लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसियों का लाभ मिलता है। इसके अलावा, टर्म प्लान एवं अन्य लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसियों आदि का पॉलिसी टर्म जब भी समाप्त हो जाता है तो उनका भी लाभ इंश्योर्ड व्यक्ति को मिलता है। ऐसे में ग्राहकों को यह बात आसानी से पता चल सकती है कि उन्हें उनकी लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसियों का बेनिफिट कब मिलेगा, लेकिन जब बात क्लेम प्रक्रिया के द्वारा इन लाभों को लेने की आती है, तो अक्सर लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं होती है।

लाइफ़ इंश्योरेंस क्लेम तब स्वीकार्य होता है जब इंश्योर्ड व्यक्ति उस घटना, जिसके लिए पॉलिसी ने लाभ का वादा किया है, से गुज़रता है। क्लेम सेटल करने के समय, ग्राहक को एक विशेष प्रक्रिया का पालन करना होता है। जबकि कई व्यक्तियों का मानना है कि क्लेम की प्रक्रिया तकनीकी रूप से स्वत: काम करती है और इसलिए वे इस प्रक्रिया से अनजान रहते हैं। फ़िर भी, यह जानना ज़रूरी है कि क्लेम कब किया जाता है और उसके लिए ज़रूरी जानकारी कैसे जुटाई जाती है। ऐसे में लाइफ़ इंश्योरेंस क्लेम्स और उन्हें दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में पूरी गाइड यहाँ पढ़ें-

लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी में दावा कब होता है?

लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत क्लेम तीन स्थितियों में होते हैं जो इस प्रकार हैं –

मच्योरिटी क्लेम – यह तब होता है जब पॉलिसी का चुना हुआ टर्म समाप्त हो जाता है। इस समय, इंश्योरेंस कंपनी एक मच्योरिटी बेनिफिट का भुगतान करती है।
सर्वाइवल क्लेम – यह मनी-बैक पॉलिसियों पर लागू होती है जिसमें एक निश्चित अंतराल पर इंश्योर्ड एमाउंट के एक हिस्से का भुगतान किया जाता है। मनी बैक बेनिफिट्स के भुगतान को सर्वाइवल क्लेम या सर्वाइवल बेनिफिट कहा जाता है। यह डयू बेनिफिट है यदि इंश्योर्ड व्यक्ति उस डयू डेट पर जीवित है जब मनी-बैक किस्त डयू होती है तो इसका भुगतान किया जाता है।
डेथ क्लेम – यदि पॉलिसी टर्म के दौरान इंश्योर्ड व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो डेथ क्लेम की स्थिति बनती है। इस स्थिति में इंश्योरेंस कंपनी डेथ क्लेम का बेनिफिट देती है।

क्लेम फाईलिंग

प्रत्येक प्रकार के क्लेम के लिए अलग-अलग फाइलिंग प्रक्रिया है –

मच्योरिटी क्लेम
पॉलिसी होल्डर के लिए मच्योरिटी क्लेम डयू होता है। आमतौर पर, इंश्योरेंस कंपनी मच्योरिटी क्लेम का भुगतान एडवांस में तैयार करती है। मच्योरिटी डेट से पहले इंश्योरेंस कंपनी द्वारा पॉलिसी होल्डर को एक डिस्चार्ज वाउचर भेजा जाता है। मच्योरिटी क्लेम के लिए इस वाउचर को पॉलिसी होल्डर द्वारा भरकर जमा करना आवश्यक है। इस क्लेम को सीधे पॉलिसी होल्डर के बैंक खाते में जमा किया जाता है।

ज़रूरी दस्तावेज़

  • सही से भरा हुआ डिस्चार्ज वाउचर
  • ऐज सर्टिफिकेट
  • पॉलिसी डाक्यूमेंट्स
  • पॉलिसी के दौरान किए गए किसी असाइनमेंट की डिटेल्स

सर्वाइवल क्लेम

सर्वाइवल क्लेम, मच्योरिटी क्लेम की तरह, इंश्योरेंस कंपनी के द्वारा एडवांस में तैयार किए जाते हैं। जिस डेट को क्लेम किया जाता है, उसी डेट को पॉलिसी होल्डर द्वारा डिस्चार्ज वाउचर भरकर जमा किया जाना चाहिए इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी होल्डर के बैंक एकाउंट में क्लेम का भुगतान करेगी।

आवश्यक दस्तावेज़

  • पॉलिसी डाक्यूमेंट्स की फोटोकॉपी
  • पॉलिसी होल्डर की बैंक एकाउंट डिटेल्स
  • डिस्चार्ज वाउचर
  • डेथ क्लेम

डेथ क्लेम करना सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी को मृत्यु की जानकारी तब तक नहीं होती है जब तक उसे सूचित नहीं किया जाता है। मृत्यु के मामले में, डेथ क्लेम जमा करना नॉमिनी का कर्तव्य है। क्लेम प्रक्रिया को शुरू करने के लिए, नॉमिनी को डेथ क्लेम फॉर्म भरना होगा और इंश्योरेंस कंपनी को जमा करना होगा, जिसमें इंश्योर्ड व्यक्ति की मृत्यु का डेथ सर्टिफिकेट शामिल होगा जो मृत्यु को प्रमाणित करता है। क्लेम फॉर्म में मौत से जुड़ी जानकारी और नॉमिनी व्यक्ति की डिटेल होनी चाहिए। इन सभी संबंधित दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा किया जाना चाहिए। बीमा कंपनी फ़ॉर्म का विश्लेषण करती है जो सबमिट किए गए डाक्यूमेंट्स को वेरीफाई करती है और यदि सब कुछ सही होता है, तो डेथ क्लेम का भुगतान करती है।

आवश्यक दस्तावेज़

  • डेथ क्लेम फॉर्म
  • डेथ सर्टिफिकेट
  • पॉलिसी डाक्यूमेंट्स
  • नॉमिनी की बैंक डिटेल्स
  • नॉमिनी का आईडेंटी प्रूफ
  • असाइनमेंट संबंधित डाक्यूमेंट्स यदि पॉलिसी असाइन की गई थी
  • यदि नॉमिनी की प्रक्रिया सही से पूरी नहीं की गई है तो उससे संबंधित लीगल डाक्यूमेंट्स
  • इसके अलावा, एक्सीडेंटल डेथ के मामले में, नीचे बताए गए एक्स्ट्रा डाक्यूमेंट्स की भी आवश्यकता होगी –
  •  एफ.आई.आर.
  • पुलिस पूछताछ रिपोर्ट / पंचनामा
  • कोरोनर की रिपोर्ट
  • डॉक्टर की रिपोर्ट
  •  इंश्योरेंस कंपनी द्वारा मांगे गए मेडिकल रिकॉर्ड आदि

तो, लाइफ़ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए क्लेम करना मुश्किल नहीं है अगर आप इसकी प्रक्रिया को जानते हैं तो। लाइफ़ इंश्योरेंस क्लेम करने के बारे में अपने ग्राहकों को शिक्षित करें ताकि उन्हें पता चले कि वो अपना क्लेम बेनिफिट कैसे प्राप्त करें जो उनकी पॉलिसी उनसे वादा करती है।

कोरोना से मौत पर क्‍लेम से इंकार नहीं कर सकतीं बीमा कंपनियां
कोरोना वायरस के कारण किसी मरीज की मौत हो जाती है तो बीमा कंपनियां क्लेम से इंकार नहीं कर सकतीं। जीवन बीमा परिषद ने कहा कि सभी बीमा कंपनियां कोविड-19 के चलते हुई मौत के सिलसिले में दावों का निपटान करने के लिए बाध्य हैं। परिषद ने एक बयान में कहा कि सार्वजनिक और निजी, दोनों तरह की जीवन बीमा कंपनियां कोविड-19 से संबंधित किसी भी मौत पर क्लेम के निपटान के लिए प्रतिबद्ध हैं।

लागू नहीं होगा ‘फोर्स मेजर’
परिषद ने कहा कि कोविड-19 से मौत के दावों के मामले में ‘फोर्स मेजर’ का प्रावधान लागू नहीं होगा। फोर्स मेजर का मतलब है कि ऐसी अप्रत्याशित दशाएं, जब समझौते का पालन बाध्यकारी नहीं होता। यह बयान उन ग्राहकों को भरोसा दिलाने के लिए जारी किया गया है, जिन्होंने इस संबंध में जीवन बीमा कंपनियों से सफाई मांगी थी और अफवाहों को दूर करने के लिए कहा था।

कोविड-19 के चलते हर घर में लाइफ इंश्योरेंस को बल
भी जीवन बीमा कंपनियों ने इस संबंध में व्यक्तिगत रूप से अपने ग्राहकों को सूचित किया है। जीवन बीमा परिषद के महासचिव एस एन भट्टाचार्य ने कहा, ‘कोविड-19 महामारी के वैश्विक और स्थानीय स्तर पर बढ़ते प्रकोप से प्रत्येक घर में जीवन बीमा की जरूरत को बल मिला है।’

बीमा कंपनियों ने कहा, हम ग्राहकों के साथ
भट्टाचार्य ने आगे कहा, जीवन बीमा उद्योग यह सुनिश्चित करने के लिए हर उपाय कर रहा है कि लॉकडाउन के कारण पॉलिसीधारकों को कम से कम दिक्कत हो और न हो, उन्हें डिजिटल माध्यमों के जरिए निर्बाध रूप से सहायता मिले, फिर चाहे वह कोविड-19 से संबंधित मौत के क्लेम का निपटान हो या पॉलिसी से संबंधित कोई दूसरी सेवा। इस कठिन समय में जीवन बीमा कंपनियां अपने ग्राहकों के साथ हैं और ग्राहकों को अफवाहों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।