जानिए ऐतिहासिक फैसला “तीन तलाक” को “तलाक” देने वाले वो 5 जजों के बारे में

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नई दिल्ली: तीन तलाक के जिस मुुद्दे पर मंगलवार (22 अगस्त) को पूरे देश की निगाहें लगी रहीं उस पर फैसला देने वाले सुप्रीम कोर्ट के #पांचजज हैं। ऐसे में जबकि एक ऐतिहासिक फैसला आया है, तो ये जानना सबके लिए दिलचस्प होगा कि आखिर ये जज कौन हैं जिन्होने इतने बड़े फैसले को सुनाया है। तो आइए हम आपको बताते हैं उनके बारे में…

चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जेएस खेहर
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जेएस खेहर का जन्म 28 अगस्त 1952 को हुआ था। खेहर ने 1979 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वकालत शुरू की थी। जनवरी 1992 में वो पंजाब के एडिशनल जनरल एडवोकेट बनाए गए। 8 फरवरी 1999 को पंजाब हाई कोर्ट में बतौर जज जस्टिस खेहर की नियुक्ति हुई। 2011 सितंबर में वह सुप्रीम में जज बने। चार जनवरी 2017 को खेहर सुप्रीम के मुख्य न्यायधीश बने। 28 अगस्त, 2017 को वो रिटायर हो जाएंगे। जस्टिस खेहर तीन तलाक पर अपने रिटायरेंट से पहले सुनवाई पूरी करना चाहते हैं। गौरतलब है कि जस्टिस खेहर सिख धर्म से आते हैं।

जस्टिस आरएफ नरीमन
जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन का जन्म 13 अगस्त 1956 को मुंबई में हुआ था। आरएफ नरीमन को सुप्रीम कोर्ट का वरिष्ठ वकील बनाया था। जस्टिस नरीमन 45 साल के बजाए 37 साल में ही सुप्रीम कोर्ट में वरीष्ठ वकील बन गए थे। इसके लिए जस्टिस वेंकेटचेलैया ने कोर्ट के नियमों में संशोधन किया था। 7 जुलाई, 2014 को नरीमन सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने। वह पारसी धर्म से आते हैं।

जस्टिस उदय उमेश ललित
जस्टिस उदय उमेश ललित का जन्म 9 नवंबर 1957 को हुआ था। उदय उमेश ललित ने 1983 में वकालत शुरू की थी। उन्होंने 1985 तक बॉम्बे हाईकोर्ट में वकालत की, इसके बाद 1986 में वकालत करने के लिए वो दिल्ली आ गए। अप्रैल 2004 में वह सुप्रीम कोर्ट में सीनियर वकील बने। 13 अगस्त, 2014 को जस्टिस ललित सुप्रीम कोर्ट में जज बने। जस्टिस उदय उमेश ललित हिंदू धर्म से आते हैं। वो 8 नवंबर, 2022 को रिटायर होंगे।

जस्टिस कुरियन
तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करने वाले दूसरे जस्टिस कुरियन का जन्म 30 नवंबर 1953 में केरल में हुआ था। जस्टिस कुरियन केरल हाई कोर्ट के दो बार कार्यकारी चीफ जस्टिस रह चुके हैं। 8 मार्च, 2013 को जस्टिस कुरियन सुप्रीम कोर्ट में जज बने। बता दें कि 29 नवंबर, 2018 को कुरियन रिटायर होंगे। गौरतलब है कि जस्टिस कुरियन ईसाई धर्म से आते हैं।

जस्टिस अब्दुल नजीर
जस्टिस अब्दुल नजीर का जन्म 5 जनवरी 1958 को कर्नाटक हुआ था। उन्होंने वकालत की शुरुआत कर्नाटक हाईकोर्ट से 1983 में की। जस्टिस नजीर को 2003 में कर्नाटक हाई कोर्ट में अतिरिक्त जज बनाया गया। वहीं सितंबर 2004 में उन्हें कर्नाटक हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया। नजीर तीसरे ऐसे जज हैं जो बिना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने, सुप्रीम कोर्ट के जज बने। उन्हें इसी साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट का जज बनाया गया। वह मुस्लिम धर्म से आते हैं।