जानिए योग गुरु महेश अग्रवाल से कैसा हो आहार ? आहार आरोग्यवर्धक औषधि कैसे बनता है ?

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आयुर्वेद के अनुसार आहार स्वयं औषधि है | यह आरोग्यवर्धक, हानिरहित और मौसम के अनुसार होना चाहिए | जाड़े में गेहूं के साथ एक – चौथाई मात्रा में चना मिलाकर रोटी खानी चाहिए | आहार की मात्रा को लेकर आयुर्वेद में उल्लेख किया गया है कि हमें पेट का आधा हिस्सा अन्न से और एक – चौथाई हिस्सा पानी व तरल पदार्थो से भरना चाहिए | शेष एक – चौथाई खाली रखना चाहिए | आकंठ खाने से अपचन की आशंका रहती है | देर रात खाने से बचना चाहिए | यदि सुविधाजनक हो तो सूर्यास्त के पहले या सोने के चार घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए | ख़ासतौर पर ठंड के दिनों में मैदे से बचना चाहिए, जो अन्य नुकसानों के अलावा कब्ज भी बढ़ाता है |

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