रघुवंश प्रसाद का पत्र मीडिया में सार्वजनिक होने के बाद हरकत में आये लालू प्रसाद
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रांची। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कद्दावर नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह द्वारा दिल्ली के एम्स से तीन-चार लाइन के हस्तलिखित पत्र ने पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को अंदर तक हिला कर रख दिया है। यही कारण है कि रघुवंश प्रसाद सिंह के पत्र के मीडिया में सार्वजनिक होने के बाद तुरंत लालू प्रसाद यादव खुद डैमेज कंट्रोल में जुट गये।

लालू प्रसाद के करीबी सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक बंदी होने के कारण लालू प्रसाद को हिरासत में भी टीवी की सुविधा मिली हुई है, जैसे ही उन्हें रघुवंश प्रसाद सिंह के पत्र की जानकारी मिली, तत्काल अपने संपर्कां के माध्यम से उन्हें मनाने की कोशिश शुरू कर दी और हस्तलिखित पत्र लिखकर पार्टी कार्यकर्त्ताओं को यह संदेश देने का काम किया। उन्होंने कहा कि रघुवंश प्रसाद सिंह से लालू का चार दशक पुराना संबंध है और अब भी उनके लिए बड़ा सम्मान है।

लेकिन जेल में रहने की विवशता और संवादहीनता के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। जिस अंदाज में सुबह में रघुवंश प्रसाद सिंह ने लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखा था, उसी अंदाज में लालू प्रसाद यादव ने भी गुरुवार की शाम में रघुवंश प्रसाद को पत्र लिखकर पार्टी के सभी नेताओं को यह संदेश देने का काम किया है कि रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे नेताओं की नाराजगी आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को महंगी पड़ सकती है। इसलिए कोई ऐसा कदम नहीं उठाये, जिससे संगठन को नुकसान उठाना पड़ा।

लालू प्रसाद यादव के करीबी जानकारों ने बताया कि उन्होंने रघुवंश प्रसाद सिंह के पत्र के सार्वजनिक होने के साथ ही राजनीतिक संदेश देने के लिए हस्तलिखित पत्र लिखकर जेल प्रशासन को भेज दिया था, लेकिन मीडिया में पत्र जारी होने में विलंब से वे थोड़े बेचैन और खासे नाराज भी दिखे। बाद में जब उन्हें यह जानकारी मिली कि उनका भी पत्र मीडिया में जारी हो चुका है और उनकी बात रघुवंश प्रसाद सिंह के पास तक पहुंच गयी है, तो उन्हें थोड़ी राहत मिली।

लालू प्रसाद यादव ने अपने चार दशक पुराने संबंधों का हवाला देते हुए पत्र में लिखा है कि मिल बैठकर सारे मामले पर विचार किया जाएगा। लालू प्रसाद यादव के पत्र के अंतिम लाइन में रघुवंश प्रसाद सिंह के लिए अपनापन के साथ ही अधिकार भी झलक रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा है- फिर बैठ के बात करेंगे, आप कहीं नहीं जा रहे है, समझ लिजिए।

लालू प्रसाद यादव के इस पत्र को पहले रिम्स के निदेशक बंगले से पहले होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार के अधीक्षक के पास पहुंचाया गया और अधीक्षक के हस्ताक्षर तथा जेल प्रशासन की मुहर लगने के बाद इस पत्र को औपचारिक रूप से रघुवंश प्रसाद सिंह को भेजने का निर्णया लिया गया, साथ ही यह पत्र मीडिया में भी जारी सार्वजनिक कर दिया गया।