मृत अधिकारी के नाम से जारी किया पत्र

जबलपुर@ भ्रष्टाचार के आरोपों में अक्सर घिरे रहने वाले रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीयू) में एक नया खुलासा हुआ है। एक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी ने न्यायालय के आदेश पर कार्रवाई करने की मांग संबंधी एक पत्र विश्वविद्यालय को भेजा था। जिसके जवाब में विश्वविद्यालय प्रशासन से उसे एक पत्र प्राप्त हुआ, लेकिन पत्र जिस अधिकारी के नाम से जारी हुए थे उसको देख कर दिहाड़ी कर्मी के होश ही उड़ गए। दरअसल आरडीयू प्रशासन ने एक मृत अधिकारी के हस्ताक्षर वाला पत्र उसे थमा दिया था। इस बात का खुलासा होने के बाद पीड़ित पक्ष ने कुलपति के समक्ष गुहार लगाई है।

आरडीयू में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी उमाशंकर मिश्रा को 2002 में विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्य मुक्त कर दिया था। जिसके विरुद्ध उक्त कर्मी न्यायालय की शरण में चला गया। न्यायालय ने उमाशंकर को राहत देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को उक्त प्रकरण में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। काफी दिनों तक तो विश्वविद्यालय प्रशासन उक्त मामले में आनाकानी करता रहा, लेकिन मामला न्यायालय के आदेश से संबंधित था, तो 9 दिसंबर 2016 को एक पत्र जारी कर दिया, लेकिन 9 दिसंबर को जारी हुए उक्त पत्र में एक हस्ताक्षर उस अधिकारी का है जिसके नवंबर 2016 मौत हो चुकी थी। लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन की पूरी कार्रवाई संदेह के घेरे में आ गयी है।

बताया गया कि उमाशंकर मिश्रा को आरडीयू के एक कर्मचारी नेता से कथित मारपीट के मामले में कार्यमुक्त किया गया था। उक्त कर्मचारी नेता की आरडीयू के स्थापना विभाग में अच्छी खासी पकड़ है। कुछ माह पूर्व तक तो वह खुद भी उक्त विभाग में पदस्थ था। आरडीयू में व्याप्त चर्चाओं को सही मानें तो उक्त कर्मचारी नेता की दिमाग की उपज के चलते ही मृत अधिकारी के हस्तााक्षर वाले पत्र को जारी किया गया है।