प्रदेश के 22 जिलों को सिंचित करेगी पीएम की योजना
भोपाल। मध्यप्रदेश के 22 जिले के खेतों को अब केंद्र की योजना के तहत सिंचित किया जाएगा। प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से अब जिले की अलग सिंचाई योजना बनाई जाएगी। इसमें प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत आईएएस और आईएफएस अफसरों की अगुवाई में सात साल की योजना बनेगी। इसमें जल स्रोत का उपयोग किस तरह सिंचाई के लिए किया जा सकता है, उस पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किए जाएंगे। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि लघु सिंचाई योजना, मनरेगा, वॉटरशेड सहित अन्य योजनाओं का एक छतरी के नीचे लाया जाएगा।
जहां स्टॉप डैम बनाने की जरूरत होगी, वहां इसके निर्माण की सिफारिश जिला सिंचाई योजना में की जाएगी। साथ ही पुराने तालाब, कुएं, नहर आदि को दुरुस्त करने के साथ नदियों से सिंचाई के लिए व्यवस्था बनाने के काम भी योजना में किए जाएंगे। प्रमुख सचिव कृषि डॉ.राजेश कुमार राजौरा ने बताया कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ा है। इसके कारण उत्पादन भी बढ़ रहा है।
सिंचाई क्षमता में और विस्तार के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री सिंचाई योजना लागू की है। पहले चरण में 22 जिलों का चयन योजना के तहत हुआ है। इन जिलों में सिंचाई के हर विकल्प को तलाशकर उसके सदुपयोग की योजना सात साल की जरूरत के हिसाब से बनाई जाएगी।
इन जिलों का हुआ चयन- छिंदवाड़ा, डिंडोरी, नरसिंहपुर, दमोह, सागर, टीकमगढ़, रीवा, सीधी, अनूपपुर, अशोकनगर, श्योपुर, आलीराजपुर, बड़वानी, इंदौर, धार, नीमच, उज्जैन, देवास, विदिशा, राजगढ़, सीहोर और बैतूल।