महाकालेश्वर मन्दिर में कोटेश्वर महादेव के अभिषेक से प्रारम्भ हुआ शिवनवरात्रि उत्सव

उज्जैन @ श्री महाकालेश्वर मन्दिर में 16 फरवरी से शिवनवरात्रि उत्सव कोटितीर्थ के समीप स्थित श्री कोटेश्वर महादेव का अभिषेक, पूजन-अर्चन एवं 11 ब्राह्मणों द्वारा श्री महाकालेश्वर भगवान का अभिषेक एकादश-एकादशमी रूद्रपाठ से प्रारम्भ हुआ। शिवनवरात्रि के प्रथम दिन श्री महाकालेश्वर मन्दिर के नैवेद्य कक्ष में भगवान श्री चंद्रमौलेश्वर का पूजन किया गया। कोटितीर्थ कुण्ड के पास स्थापित कोटेश्वर महादेव में पं.घनश्याम शर्मा शासकीय पुजारी के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा पूजा-अर्चना सम्पन्न हुई। मन्दिर समिति के प्रशासक अवधेश शर्मा ने 11 ब्राह्मणों को वरूणी एवं धोती-सोला भेंटकर सम्मानित किया। पूजन उपरान्त भगवान महाकाल का पूजन हुआ। गुरूवार 16 फरवरी से नित्य श्री कोटेश्वर महादेव का पूजन-अर्चन उपरान्त भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन होगा। तत्पश्चात भोग आरती एवं अन्य आरतियों के समय आम दर्शनार्थियों को प्रवेश प्रतिबंध रहेगा।

श्री महाकालेश्वर मन्दिर प्रबंध समिति के प्रशासक अवधेश शर्मा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र धारण करवाये गये। इसमें सोला एवं दुपट्टा तथा जलधारी को मेखला धारण करवाया गया। प्रतिदिन शाम को भगवान महाकाल को नवीन वस्त्र धारण कराये जायेंगे और शिवनवरात्रि में प्रत्येक दिन भगवान महाकाल विभिन्न स्वरूपों में दर्शन देंगे। शुक्रवार 17 फरवरी को भगवान महाकाल को शेषनाग धारण कराया जायेगा। प्रशासक शर्मा ने आम दर्शनार्थियों को अवगत कराया कि शिवनवरात्रि में प्रात: 9 बजे से 01 बजे तक एवं अपराह्न 03 बजे से 05 बजे तक भगवान महाकाल का पूजन एवं श्रृंगार के समय तथा नियमित आरती के दौरान गर्भगृह में प्रवेश बन्द रहेगा। इस दौरान दर्शनार्थी नन्दी हॉल के पीछे लगे बैरिकेट से भगवान महाकाल का दर्शन कर सकेंगे।

श्री महाकालेश्वर मन्दिर में भगवान महाकाल को शिवनवरात्रि के दूसरे दिन शुक्रवार 17 फरवरी को शेषनाग श्रृंगार किया जायेगा। इसी प्रकार तीसरे दिन 18 फरवरी को घटाटोप श्रृंगार, चौथे दिन 19 फरवरी को छबीना श्रृंगार, पांचवे दिन 20 फरवरी को होलकर श्रृंगार, छटवे दिन 21 फरवरी को मनमहेश श्रृंगार, सातवे दिन 22 फरवरी को उमा-मनमहेश श्रृंगार, आठवे दिन 23 फरवरी को शिवतांडव श्रृंगार, नवे दिन 24 फरवरी को महाशिवरात्रि श्रृंगार एवं दसवे दिन 25 फरवरी को सप्तधान श्रृंगार के साथ ही प्रतिदिन कटरा, मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंडमाल, छत्र आदि वस्त्र एवं आभूषण पहनाये जायेंगे।