नए बजट से गांवों को हैं कई उम्मीदें

बजट में ग्रामीण इलाकों में बिजली, पीने के साफ पानी और आवास की सुविधाओं को लेकर उम्मीदें काफी ज्यादा हैं।
सड़क, बिजली, पानी, रहने की जगह, रोजगार के साथ साथ शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था, किसी भी बजट से गांव वालों की उम्मीदें इन्हीं बुनियादी सुविधाओं के इर्द गिर्द घूमती हैं।

देश में हर गांव तक बिजली पहुंचाना सरकार दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना का सपना है। 18,452 में से अब तक 11,777 गावों तक बिजली पहुंच चुकी है। एक मई 2018 तक हर गांव तक बिजली पहुंचना है। बीते बजट में 8500 करोड़ रूपए इस योजना को दिए गए थे। जरूरत पड़ी तो लक्ष्य को हासिल करने के लिए बजट बढ़ाया जा सकता है।

साथ ही 17.5 करोड़ घरों तक बिजली पहुंचानी है जिसमें से 12.4 करोड़ घरों तक बिजली पहुंचाई जा सकी है। करीब 5 करोड़ घरों तक रोशनी पहुंचाने के लिए बजट में आवंटन बढ़ सकता है।

बीते साल के बजट में 2019 तक प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले मकानों को टैक्स और ब्याज में छूट का फायदा मिलता रहेगा। बीते साल प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 20 हजार करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई थी।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कैसे लाभार्थियों को शामिल किया जाए इस पर पूर्व वित्त सचिव सुमित बोस की रिपोर्ट सरकार ने स्वीकार कर ली है। उम्मीद है कि 2022 तक सभी के पास आवास के सपने को इस बजट में कुछ नए पंख मिल सकते हैं।

रुर्बन मिशन के तहत गावों को शहरों की तर्ज पर विकसित करना है। बीते बजट में देश भर में 300 ऐसे क्लस्टर्स बनाने का प्रस्ताव किया गया। बीते साल फरवरी में छत्तीसगढ़ से शुरु की गई इस योजना को अभी जमीन पर उतारना बाकी है और इसकी झलक बजट में मिल सकती है।