उपचुनाव में हुई जीत से खुश मायावती ने अखिलेश से मुलाकात के लिए भिजवाई मर्सिडीज

लखनऊः उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में जीत मिलने के बाद से समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बीच 2019 लोकसभा चुनाव में साझेदारी को लेकर सियासी अटकलें तेज हो गई हैं. नतीजे घोषित होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव जीत की बधाई देने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने उनके आवास पहुंचे थे. इतना ही नहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मायावती ने खुद अखिलेश को उनके आवास लाने के लिए एक काले रंग की मर्सिडीज कार भिजवाई.

यूपी के गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में मिली जीत के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती से मिलने लखनऊ में उनके आवास पहुंचे. अखिलेश से मुलाकात के लिए मायावती ने खुद अपनी ब्लैक मर्सिडीज भिजवाई थी. दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक मुलाकात हुई और भविष्य में चुनावी साझेदारी को लेकर अहम चर्चा हुई.

बुधवार शाम चुनावी जीत ने दो धुर विरोधी नेताओं को एक-दूसरे के करीब ला दिया. अखिलेश मॉल एवेन्यू स्थित मायावती के आवास पर उनसे मिलने पहुंचे और करीब एक घंटे तक उनके साथ हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के बीच कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई.

दोनों नेताओं के बीच 23 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भी बातचीत हुई. लेकिन अखिलेश और मायावती की इस मुलाकात की स्क्रिप्ट किसी और ने लिखी थी. दरअसल बसपा के राष्ट्रीय सचिव सतीश चंद्र मिश्रा और बीएसपी सांसद अशोक सिद्धार्थ ने इस मुलाकात में अहम किरदार अदा किया.

मिली जानकारी के अनुसार, परिणाम घोषित होने के बाद बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने अखिलेश को फोन पर बधाई दी और उन्हें मायावती से मुलाकात के लिए मनाया. अखिलेश मायावती से मिलने के लिए तैयार हो गए और मायावती ने भी सहमति जताते हुए अखिलेश के विक्रमादित्य मार्ग स्थित घर पर अपनी काले रंग की एक मर्सिडीज भिजवाई.

मर्सिडीज में सवार अखिलेश अपने काफिले के साथ मायावती के घर पहुंचे और दोनों नेताओं ने चाय पर करीब एक घंटे तक चर्चा की. दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद उन अटकलों को और भी बल मिल गया है, जिनके मुताबिक, 2019 में बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए एक बार फिर सपा-बसपा हाथ मिलाएंगे. यानी तीसरे मोर्चे के दो अहम दल अगर साथ आते हैं तो लाजमी है कि बीजेपी के मुश्किलें बढ़ने वाली हैं और अब जल्द से जल्द बीजेपी को इस गठबंधन की काट निकालनी होगी.