राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा अधिवक्ताओं का ऑन, लाइन मीडिएशन प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

जबलपुर। मुख्य न्यायाधीश एवं मुख्य संरक्षक म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति श्री एके मित्तल, की प्रेरणा तथा न्यायमूर्ति श्री संजय यादव, कार्यपालक अध्यक्ष, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देश में ऑन लाइन मीडिएशन प्रशिक्षण संपन्न हुआ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कटनी जिले की तहसील ढीमरखेड़ा, खंडवा जिले की तहसील हरसूद, पुनासा, मंडला जिले की तहसील निवास, नैनपुर, मंडलेश्वर जिले की तहसील महेश्वर, पन्ना जिले की तहसील अजयगढ़, रायसेन जिले की तहसील उदयपुरा, गैरतगंज, सिलवानी तथा राजगढ़ जिले की तहसील खिलचीपुर एवं जीरापुर इन तहसील न्यायालयों में केवल एक-एक न्यायाधीश पदस्थ है यद्पि न्यायाधीशों को मीडिएटर के रूप में प्रशिक्षित किया जा चुका है, लेकिन वह स्वयं के न्यायालय के मामलों में मध्यस्थता नहीं कर सकते।

इन तहसीलों में अन्य प्रशिक्षित मीडिएटर न होने से प्रकरणों में मध्यस्थता नहीं हो पाती थी। अत: ऐसी सभी 12 तहसीलों में स्थित न्यायालयों में मध्यस्थता द्वारा प्रकरणों के निराकरण हेतु 24 अधिवक्ताओं हेतु 40 घंटे का ऑन लाइन प्रशिक्षण का आयोजन 17 अगस्त से 28 अगस्त, तक गिरिबाला सिंह, सदस्य सचिव व पोटेंशियल ट्रेनर मप्र विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर एवं श्री राजीव कर्महे, रजिस्ट्रार एवं सचिव व पोटेंशियल ट्रेनर, उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति, जबलपुर द्वारा प्रदाय किया गया।

इसके अतिरिक्त रिसोर्स पर्सन के रूप में डॉ. ओपी रायचंदानी, मनोचिकित्सक, मेडिकल कालेज, जबलपुर तथा डॉ. सीसीएस ठाकुर, सेवानिवृत्त प्रो. समाजशा विभाग, रानी दुर्गावती विवि जबलपुर द्वारा पक्षकारों की मनोदसाओं व अन्य आवश्यक पहलुओं जिन्हें मध्यस्थता किये जाने में एक विद्वान मध्यस्थ द्वारा ध्यान दिया जाना है उस पर भी प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण के माध्यम से लोगों के मध्य उत्पन्न पारिवारिक, वैवाहिक एवं अन्य विभिन्न प्रकार के न्यायालय में लंबित विवादों व न्यायालय में आने के पूर्व ही मामलों का समझौते के आधार पर निराकरण संभव हो सकेगा। मध्यस्थता की प्रक्रिया पूर्णत: गोपनीय रहती है पक्षकारों को एक दूसरे की बातें सुनने, भावनाओं को समझने का अवसर प्राप्त होता है, पक्षकार स्वयं अपना निर्णय ले सकते हैं. पक्षकारों तथा न्यायालयों के समय एवं संसाधन की बचत होगी।

असुविधा को दृष्टिगत रखते हुए प्रदेश के प्रशिक्षकों द्वारा मप्र में दूसरी बार 40 घंटे का आन लाइन मीडिएशन प्रशिक्षण अधिवक्ताओं हेतु प्रारंभ किया गया है, जिससे बड़ी संख्या में पीडि़त पक्षकारगणों को राहत प्राप्त हो सकेगी व मध्यस्थता व्यवस्ता की पहुंच एवं लाभ से दूरस्थ ग्रामीण अंचलों को तीव्र गति से लाभ प्राप्त हो सकेगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतिम दिवस आज 28 अगस्त को न्यायामूर्ति संजय यादव, कार्यपालक अध्यक्ष, मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर द्वारा 40 घंटे के प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए प्रतिभागियों के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से मध्यस्थता विषय की प्रासंगिकता, मध्यस्थता के विविध पक्षों, प्रशिक्षण से प्राप्त मार्गदर्शन के साथ ही आने वाली कठिनाईयों इत्यादि विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। साथ ही प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए समाज में समय-समय पर उत्पन्न होने वाली विभिन्न कठिनाईयों के निराकरण में मध्यस्थता पद्धति को अपनाने और उसके व्यायपक प्रचार-प्रसार देने पल बल दिया।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री बोवड़े ने किया ज्यूडिशियल एण्ड कोट्र्स आफ मध्यप्रदेश पुस्तक का विमोचन

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के द्वारा मध्यप्रदेश के न्यायालयों एवं न्यायिक इतिहास पर प्रकाशित पुस्तक ज्यूडिशियल हिस्ट्री एण्ड कोट्र्स आफ मध्यप्रदेश का आनलाइन विमोचन गुरुवार 27 अगस्त को वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से किया गया। इस पुस्तक का विमोचन न्यायालय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री शरद अरविंद बोवड़े  द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन मध्यप्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी में किया गया।

कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति श्री एएम खानविलकर एवं न्यायमूर्ति श्री हेमन्त गुप्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री अजय कुमार मित्तल, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री रविशंकर झा, आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधिपति श्री जितेन्द्र कुमार माहेश्वरी, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधिपति श्री संजय यादव एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की तीनों पीठों के न्यायाधिपति भी वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

सभी वक्ताओं ने विशेष रूप से इस पुस्तक को मूर्त रूप देने में सकारात्मक भूमिक निभाने वाले प्रोफेसर्स, उच्च न्यायालय के न्यायाधिपतियों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रुप से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति का आभार प्रकट किया।

यह पुस्तक मध्यप्रदेश की धरा पर वैदिक काल से लेकर मुगल शासन, अंग्रेजी हूकूमत, मराठा, साम्राज्य, जनजातीय व्यवस्था एवं स्वतंत्रता पश्चात की न्यायिक प्रणाली को समाविष्ट करने वाली विश्वसनीय एवं गुणात्मक जानकारी का संकलन है जो न्याय जगत से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए ज्ञान का स्तरीय स्रोत साबित होगी। यह पुस्तक मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के आईएलआर सेक्शन पर विक्रय हेतु उपलब्ध है।