उ.प्र. में 51 कोआपरेटिव बैंकों के विलय पर फैसला जल्द

उ.प्र. राज्य सहकारी बैंक और 50 जिला सहकारी बैंकों का विलय कर एक बड़ा बैंक बनाने पर फैसला जल्द हो सकता है। विलय के लिए गठित एकेडमिक टेक्निकल कमेटी के मसौदे का अध्ययन शासन स्तर पर चल रहा है। इस मसौदे पर सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव एमवीएस रामीरेड्डी अपनी टिप्पणी के साथ जल्द सरकार को सौंपेगे। विलय होने पर जो नया सहकारी बैंक बनेगा उसका एक्सटेंशन काउंटर राज्य के हर गांव में होगा।

कमजोर वित्तीय स्थिति से गुजर रहे जिला सहकारी बैंकों की स्थिति सुधारने के लिए दिसंबर-2018 में राज्य सरकार ने विलय की संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट करीब छह माह पूर्व ही सहकारिता विभाग को दे दी थी। कोरोना संक्रमण के कारण आए आपदा के कारण कमेटी की इस रिपोर्ट पर कोई कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी थी। अपर मुख्य सचिव एमवीएस रामीरेड्डी ने अब कमेटी के प्रस्तावों का अध्ययन शुरू किया है। उनका कहना है कि बहुत जल्द वह अपने सुझावों के साथ प्रस्ताव को सरकार को सौंप देंगे।

विलय होने पर सरकार पर नहीं पड़ेगा आर्थिक बोझ

अपर मुख्य सचिव के मुताबिक सरकार यदि विलय के प्रस्ताव पर सहमति देती है तो प्रदेश में जो एक नया सहकारी बैंक बनेगा, पहले ही दिन से राष्ट्रीयकृत बैंकों से मुकाबले के लिए तैयार नजर आएगा। इस बैंक का नेटवर्क प्रदेश के हर गांव तक होगा। प्रदेश सरकार ने खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहे जिला सहकारी बैंकों के लिए पहले ही 2000 करोड़ रुपये दिए हैं। यह धनराशि सुरक्षित है। इस लिहाज से विलय की स्थिति में सरकार पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। सहकारी ग्राम विकास बैंक का भी नये बनने वाले सहकारी बैंक में विलय पर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।

विलय होने पर नये बैंक की पहले ही दिन होंगी 1200 शाखाएं

विलय के लिए उ.प्र. सहकारी बैंक की 27 शाखाए तथा 50 जिला सहकारी बैंकों की करीब 1200 शाखाएं प्रस्तावित हैं। वहीं प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय करीब 7439 प्रारंभिक समितियां (पैक्स) इस नये बैंक के एक्सटेंशन काउंटर का काम करेंगे। सभी सहकारी बैंकों के साथ ही पैक्स के कंप्यूटरीकरण का काम पहले ही शुरू किया जा चुका है। उ.प्र. सहकारी बैंक की सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन हो गई हैं।