सिंधिया के समर्थन में मिर्ची बाबा, कहा- 20 हजार साधुओं के साथ सड़कों पर उतरूंगा

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शिवपुरी | मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर से बाबाओं की सक्रियता बढ़ रही है। कभी दिग्विजय सिंह के लिए मिर्ची हवन करने वाले मिर्ची बाबा अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में उतर आए हैं। मिर्ची बाबा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के उस बयान का समर्थन किया है जिसमें सिंधिया ने कहा था- अगर वचन पत्र के वादे पूरे नहीं हुए तो मैं सड़कों में उतरूंगा।

शिवपुरी में मिर्ची बाबा ने कहा- सिंधिया ने बड़ा ही सहज बयान दिया है। सिंधिया के बयान को कुछ लोग गलत बता रहे हैं। उनका बयान तर्क संगत है। अगर मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार वादे पूरे नहीं करती है तो मैं भी सड़कों पर उतरूंगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से मैं 20 हजार साधुओं के साथ कांग्रेस के प्रचार में उतरा था उसी तरह वादे पूरे नहीं होते हैं तो मैं 20 हजार साधुओं को लेकर इनके खिलाफ सड़क पर उतरूंगा।

भाजपा को नहीं मिलना चाहिए मंदिर का श्रेय
मिर्ची बाबा ने कहा- अयोध्या में राम मंदिर बनने का फैसला सुप्रीम कोर्ट का है, जिसका मैं स्वागत करता हूं। इसमें भाजपा को कोई श्रेय नहीं मिलना चाहिए। केन्द्र सरकार ने संतों के साथ ठीक नहीं किया, जो संत उनकी खुशामद करते हैं उनको राम मंदिर ट्रस्ट में रखा जा रहा है, जबकि अन्य संतों का अनादर हो रहा है। मिर्ची बाबा ने कहा कि प्रधानमंत्री को रोजगार के मुद्दे पर भी बोलना चाहिए, लेकिन वह इस पर कभी नहीं बोलते। एक विदेशी राष्ट्रपति को बुलाकर करोड़ों रुपए व्यर्थ खर्च कर रहे हैं। उस पैसे का गरीबों में उपयोग करना चाहिए। अगर प्रधानमंत्री गौमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करते हैं तो ठीक है नहीं तो कोई मतलब नहीं है।

सिंधिया हमारे बड़े और जमीनी नेता : सज्जन वर्मा
उज्जैन। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि प्रदेश की सरकार जन सेवा में लगी हुई है इसी बीच सिंधिया द्वारा सड़क पर उतरकर आंदोलन की टिप्पणी पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के बड़े नेता है और उन्हें जब कोई समस्या दिखती है या कोई पीड़ित उन्हें समस्या से अवगत कराता है तो वे निश्चित रूप से उस समस्या को लेकर गंभीर होते हैं कांग्रेस की परिपाटी रही है कि जनता के लिए जमीनी संघर्ष करना पड़े तो वह पीछे नहीं हटते उन्होंने सिंधिया को रास में भेजे जाने के विषय पर कहा कि आलाकमान को तय करना है अच्छे नेताओं को राज्यसभा में भेजा जाना चाहिए ।