भारत में तैयार मॉलीक्यूल से विश्वभर में होगी टीबी की जांच

भारत के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी डिवाइस तकनीक विकसित की है जिससे महज 90 मिनट में ही टीबी की जांच हो जाती है। इस तकनीक को ICMR के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मान्यता दी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने आईसीएमआर के वैज्ञानको की ओर से विकसित टीबी की जांच के लिए तकनीक ट्रूनेट को वैश्विक टीबी परीक्षण में शामिल किया है। खास बात यह है कि ये मेक इन इंडिया के तहत बना टीबी कार्यक्रम के लिए पहली डिवाईस है।

यह तकनीक ना केवल टीबी जांच की लागत और समय को कम करता है बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मान्यता और समर्थन देने से निम्न और मध्यम आय वाले देश भी इस तकनीक को खरीद सकते हैं। जिससे ये तकनीक विकासशील देशों में टीबी बीमारी के उन्मूलन की दिशा में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

भारत में इस वक्त करीब चौबीस लाख टीबी के मरीज हैं और भारत ने 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। उम्मीद है कि इस नयी तकनीक से जहां एक ओर टीबी की जांच में समय कम लगेगा वहीं इसे दूर-दराज के इलाकों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा जहां बिजली नहीं है। और भारत इसे दूसरे देशों को निर्यात भी कर सकता है।