ग्वालियर नगर निगम में भर्ती में गड़बड़ी, अधिकारी ने परिवार के लोगों को लगाया
ग्वालियर। नगर निगम में नौकरी करने वालों ने अपने बेटे, बहू, नाती-नातिन और भांजे तक को निगम में नौकरी पर लगवा दिया है। इसका खुलासा बैठक में हुआ, जब सभी क्षेत्राधिकारियों ने अपने क्षेत्र में किन कर्मचारियों के रिश्तेदार उनके अधीनस्थ ही काम कर रहे हैं, इसकी सूची निगम कमिश्नर को सौंपी। कमिश्नर भी यह देखकर दंग रह गए कि पूर्व क्षेत्राधिकारियों ने अपने पूरे कुनबे को ही नौकरी पर लगवा दिया है।
निगम कमिश्नर अनय द्विवेदी ने अधिकारियों के साथ ही तमाम क्षेत्राधिकारियों को 16 बिंदुओं का फॉर्मेट भेजा था। इसमें उनके क्षेत्र में कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं, कितने परमानेंट रूप से गायब हैं? जबकि कितने कर्मचारी ऐसे हैं, जिनके रिश्तेदार भी संबंधित क्षेत्र में ही काम कर रहे हैं? इसकी जानकारी मांगी गई थी। जिसमें सभी मुख्य समन्वयक अधिकारियों, क्लस्टर अधिकारियों एवं क्षेत्राधिकारियों की मौजूदगी में सफाई कर्मचारियों की संख्या को लेकर जानकारी तलब की गई।
इस दौरान पता चला कि क्षेत्र क्रमांक दस के पूर्व क्षेत्राधिकारी और वर्तमान में सेनेट्री इंस्पेक्टर अशोक मौरे ने अपने कुनबे के ही करीब 7 लोगों को नौकरी पर लगवाया है, जो कि उनके अधीनस्थ ही काम करते हैं। इस दौरान करीब 120 कर्मचारी ऐसे पाए गए, जिनकी नौकरी निगम में काम करने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों की सिफारिश पर लगी थी। कमिश्नर एक-एक जेडो से पूछकर नाम नोट करते जा रहे थे। इन कर्मचारियों को हटाने का निगम कमिश्नर का कोई मूड नहीं है, लेकिन तबादला सूची जरूर जारी की जा सकती है।
 
गायब कर्मचारियों पर गिर सकती है गाज
 
निगम कमिश्नर ने ऐसे कर्मचारियों की भी सूची मांगी थी, जो कि लंबे समय से बिना बताए नौकरी से गायब हैं। ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 35 पाई गई है। निगम कमिश्नर ने निर्देश दिए हैं कि इन सभी को तीन दिन का नोटिस जारी किया जाए और यदि नौकरी पर जॉइनिंग नहीं देते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई कर उन्हें घर बैठाने की कार्रवाई की जाए।
 
अब हैडपंप छोड़ो
 
बैठक में मौजूद सहायक खेल अधिकारी बनाए गए औबेक सिद्धीकी ने जब कहा कि मैं तो हैंडपंप प्रभारी हूं तो निगम कमिश्नर ने कहा कि अब हैडपंप को छोड़ो और सहायक खेल अधिकारी की जिम्मेदारी को संभालो।