नीमच के फूल महकेगें जर्मनी व हॉलैंड में

नीमच @ मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा दिए गए, मूलमंत्र को नीमच क्षेत्र के खेतीहरों ने न केवल बेहद संजीदगी से लिया है, बल्कि म.प्र.में संरिक्षत सामूहिक खेती को मूर्तरूप दिया है। इन किसानों ने के प्रयासों से एक, दो नही बल्कि पूरे 100 बीघा बंजर जमीन में प्रदेश का सबसे बडा वेजीटेबल, हर्बल हब लहलाने लगा है। विशेष यह है कि इस बंजर भूमि में बिना उपजाउ मिट्टी के कोकोपिट पद्धति से यह आधुनिक खेती शुरू की गई है। सामूहिक प्रयासो से 30 किसानों ने इस अवधारणा को साकार किया है। इस हब की विशेषता यह है, कि यहां पैदा होने वाली सब्जियां और वनस्पतियां, विदेशों में एसक्पोर्ट की जाएगी। इससे करीब 500 लोगों को सीधे रोजगार मिलेगा।

100 बीघा बंजर भूमि पर 32 पालीहाउस तैयार- जिले के तीस किसानों ने 100 बीघा बंजर जमीन जिस पर कभी घास भी पैदा नही होती थी। सामूहिक एवं सरंक्षित खेती की सोच के साथ जमीन तैयार की है। कुछ वयापरी जिनके पास खेती भी है। उन्होने मिलकर 30 किसान का समूह तैयार किया। इसमें परिवारों की महिलाएं भी शामिल है। जिला मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा से लगे सेमार्डा गॉव के नजदीक पहाडीनुमा बंजर जमीन का चयन किया। पहले तो कदम डगमगाने लगे, परन्तु इसी बीच उन्हे इंटरनेशनल फूड एविजबिशन दुबई जाने का मौका मिला। अनिल नाहटा के अलावा शौकीन जैन, संजय बेगानी, सत्यनारायण पाटीदार ने खाद्य प्रदर्शनी में दुबई जाकर वहां उन्होने 50 डिगी तापमान से भी अधिक गरम रेत के धोरों में सब्जियों और फलों की खेती के तरीके को देखा व समझा। उन्होने नीमच आते ही बंजर जमीन को समतल करने का जतन शुरू हुआ। इसके बाद एसएन नेचर्सफ्रेश ने आकार लेना शुरू किया। एस यानि सांवरियासेठ और एन से तात्पर्य है नाकोडा भैरव। शुरूआत में 6 पॉलीहाउस तैयार किए,इसके आगे कुल 32 पॉलीहाउस इस भूमि पर तैयार हो रहे है। केवल तीनमाह के अंतराल में पहले डोम के भीतर हाईड्रोपॉनिक पद्धति से बिना बीज की हरी ककडियों ने आकार लेना शुरू कर दिया सभी पॉलीहाउस में ककडी लगाई है।

नीमच के फूल महकेगें जर्मनी व हॉलैंड में- सउदी अरब में बिना बीज की ककडी की डिमांड आ चुकी है। पहली खेप दिल्ली की मंडियों तक पहुंचाई जाने लगी है। स्थानीय बाजार भी इस खाद्य को हाथों हाथ ले रहा है। एक पॉलीहाएस में लगभग 70 टन ककडी का उत्पादन करने का लक्ष्य है। किसान इस लक्ष्य के नजदीक हे। एसएन नेचर फ्रेश के जनरल मैनेजर डॉ.संतोषसिंह बताते है,कि यह करवां यहीं नही रूकेगा। सीडलेस कुकंबुर यहां, जो तैयार हो रही है। उसके दाम 20 रूपये प्रतिकिलो है। कुकुबंर के अलवा चेरी की फसल की तैयारी है। कुछ ही महीनों में नए पॉलीहाउस में खूबसूरत फूलों की खेती भी की जाएगी। जरबेरा, रोज, कार्नेशन, आर्चिड के प्लांट तैयार हो गए है। यह फूल क्षैत्रीय बाजार के अलावा जर्मनी के बाजार में भी जाएगें।

ड्रीप पद्धति से ऑटोमेटिक सिंचाई- इस खेती की विशेषता यह है,कि इतने बडे आकार के आधुनिक खेत के लिए पानी और बिजली की व्यवस्था अलग से की गई है। ट्यूबेल लगाकर उसके पास ढलान में 12 हजार लीटर क्षमता का अण्डर ग्राउंड वॉटरटैंक बनाया है। वर्तमान में आवश्यकता के मान से प्रतिदिन 6 लाखलीटर पानी की खपत हो रही है। इसमें हर पॉलीहाउस तक पाईप लाईन बिछाकर हाउस के भीतर जहां-जहां पौधे के कोकोपिट है,वहां तक पाईप जोडकर पानी पहुचाया गया है। टपक सिंचाई प्रक्रिया से पौधे की जडों को हमेशा नम रखा जाता है। किस डोम में कितना पानी पहुंचाना है इसका भी इंतजाम कम्प्यॅटराईज्ड किया जा रहा है।

एस.एन.नेचर्स फ्रेश के संचालक शौकीन जैने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप खेती को लाभ धंधा ही नही,बल्कि उद्योग का दर्जा दिलाने की यह एक कोशिश है। सामूहिक और संरक्षित खेती का प्रयास हमने किया है। नीमच को आधुनिक खेती के मामले में देश के नक्शे पर दिखाने की इस कोशिश में खासकर कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव और उद्यानिकी विभाग का बेहतर मार्गदर्शन मिला है। उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक एस.सी.शर्मा का कहना है,कि प्रदेश में एक ही स्थान पर इतने बडे आकार में संरक्षित खेती का यह सबसे बडा प्रयास है। सामूहिक रूप से खाद्य सब्जियों और वनस्पतियों का हब बनाने का यह बडा उदाहरण है। इसे विशेष दर्जे में शामिल करने के लिए शासन को प्रस्ताव पहुंचाया जाएगा। कलेक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि यह निश्चित रूप से सामूहिक और संरक्षित कृषि का अच्छा उदाहरण है। खाद्य प्रसंस्करण के क्षैत्र में नीमच में असीम संभावनाएं है। इसके लिए एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस हर्बल हब में हर-सम्भव मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध करवाया जायेगा।