New Education Policy 2020: नई शिक्षा नीति, अब पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद सीधे कर सकेंगे पीएचडी, कॉलेज की डिग्री 4 साल की MPhil होगा बंद

New Education Policy 2020: कानून और चिकित्सा कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थान एक ही नियामक द्वारा संचालित होंगे. नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। 34 साल बाद आ रही नई शिक्षा नीति में कई बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। अब साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स में विषय नहीं बंटे होंगे यानी स्टूडेंट अपनी पसंद के विषय लेने को स्वतंत्र होंगे।

New Education Policy 2020: देश की नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब छात्रों को एमफिल नहीं करना होगा. एमफिल का कोर्स नई शिक्षा नीति में निरस्त कर दिया गया है. नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब छात्र ग्रेजुएशन,पोस्ट ग्रेजुएशन और उसके बाद सीधे पीएचडी करेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. इसी के साथ अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है.

शिक्षा सचिव अमित खरे ने कहा, आज की व्यवस्था में अगर चार साल इंजीनियरंग पढ़ने या 6 सेमेस्टर पढ़ने के बाद किसी कारणवश आगे नहीं पढ़ पाते हैं तो कोई उपाय नहीं होता, लेकिन नई शिक्षा नीति में छात्रों के लिए विभिन्न शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में मल्टीपल एंट्री और एग्जिट सिस्टम में 1 साल के बाद सर्टिफिकेट, 2 साल के बाद डिप्लोमा और 3-4 साल के बाद डिग्री मिल जाएगी। यह छात्रों के हित में एक बड़ा फैसला है । वहीं, जो छात्र रिसर्च में जाना चाहते हैं उनके लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा, जबकि जो लोग नौकरी में जाना चाहते हैं वो तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। “ नई शिक्षा नीति के मुताबिक यदि कोई छात्र इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम 2 वर्ष में ही छोड़ देता है तो उसे डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा 1 वर्ष में सर्टिफिकेट और कोर्स पूरा करने पर डिग्री प्रदान की जाएगी.”

नई शिक्षा नीति के तहत एमफिल कोर्सेज को खत्म किया जा रहा है. कानून और चिकित्सा कॉलेजों को छोड़कर सभी उच्च शिक्षण संस्थान एक ही नियामक द्वारा संचालित होंगे. निजी और सार्वजनिक उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए साझा नियम होंगे. विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए कॉमन एन्ट्रेंस एग्जाम होंगे.

  • नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा.
  • बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो, एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा
  • 9वींं से 12वींं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा
  • वहीं कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल की होगी. यानि कि ग्रेजुएशन के पहले साल पर सर्टिफिकेट, दूसरे साल पर डिप्‍लोमा, तीसरे साल में डिग्री मिलेगी.
  • 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए है जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं लेना है. वहीं हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. 4 साल की डिग्री करने वाले स्‍टूडेंट्स एक साल में MA कर सकेंगे.
  • अब स्‍टूडेंट्स को MPhil नहीं करना होगा. बल्कि MA के छात्र अब सीधे PHD कर सकेंगे.
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि जीडीपी का छह फीसदी शिक्षा में लगाया जाए जो अभी 4.43 फीसदी है.

केंद्रीय शिक्षा सचिव ने कहा, “अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन की तर्ज पर भारत में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन लाया जाएगा. इसमें विज्ञान के साथ सामाजिक विज्ञान भी शामिल होगा और शोध के बड़े प्रोजेक्ट्स की फाइनेंसिंग करेगा. ये शिक्षा के साथ रिसर्च में हमें आगे आने में मदद करेगा.” बुधवार को जारी की गई नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि शिक्षकों को मजबूत एवं पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से भर्ती किया जाएगा. पदोन्नति योग्यता-आधारित होगी, तथा मूल्यांकन बहु-स्रोत आवधिक प्रदर्शन पर आधारित होगा. शैक्षिक प्रशासक या शिक्षक प्रशिक्षक बनने के लिए शिक्षकों को प्रगति पथ उपलब्ध होंगे.

नई शिक्षा नीति में इसरो के पूर्व चीफ के. कस्तूरीरंगन की अहम भूमिका
नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए 31 अक्टूबर, 2015 को सरकार ने पूर्व कैबिनेट टी.एस.आर. सुब्रहमण्यन की अध्यक्षता में 5-सदस्यीय समिति गठित की थी जिसने अपनी रिपोर्ट 27 मई, 2016 को प्रस्तुत की थी। 24 जून, 2017 को, सरकार ने जाने-माने अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति ने 31 मई, 2019 को अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंप दी। राज्य सरकारों और भारत सरकार के मंत्रालयों को डीएनईपी 2019 पर उनके विचारों और टिप्पणियों को आमंत्रित करने के लिए पत्र लिखे गए।