किसी दल ने नहीं दी ईवीएम हैकिंग की चुनौती

चुनाव आयोग की इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को हैक करने की चुनौती को किसी राजनीतिक दल ने नहीं स्वीकारी। हालांकि दो राजनीतिक दलों ने जानकारी हेतु इसमें भाग लिया।
चुनाव आयोग ने शनिवार को ईवीएम चैलेंज का आयोजन किया, जिसमें केवल सीपीएम और एनसीपी ही पहुंची। ईवीएम चैलेंज में किसी भी पार्टी ने हिस्सा नहीं लिया लेकिन मशीन के तमाम सुरक्षा इंतजामों की विस्तृत जानकारी ली।

नसीम जैदी ने ईवीएम पर विश्वास जताते हुए कहा, इसे हैक नहीं किया जा सकता और इसमें छेड़छाड़ भी संभव नहीं है। इसके परिणाम बदले नहीं जा सकते। उन्होंने बताया कि चैलेंज में हिस्सा लेने वाली सीपीएम ने संतुष्टि जताई और जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव दिया।

जैदी ने बताया कि एनसीपी के शक का कारण निकाय चुनावों में प्रयोग की गई मशीनें थीं। इस पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि निकाय चुनावों में राज्य चुनाव आयोग की मशीनों का इस्तेमाल हुआ था और वह भारत निर्वाचन आयोग की नहीं थीं।

चुनाव आयोग ने ईवीएम चैलेंज पर कहा कि इसमें न किसी की हार है और न किसी की जीत, देश के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे। मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने सभी दलों को आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी चुनाव वीवीपीएटी के जरिए होंगे, जिससे देश में ईवीएम को लेकर भरोसा और मज़बूत होगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अकादमिक परीक्षण के लिए चुनाव आयोग हमेशा किसी भी राजनीतिक दल की सलाह और प्रयोग के लिए तैयार रहता है और भविष्य में भी इसका स्वागत किया जाएगा। ईवीएम चैलेंज पर उत्तराखंड उच्च न्यायलय के फ़ैसले के बाद चुनाव आयोग को उम्मीद है कि भविष्य में अब किसी भी तरह का विवाद नहीं होगा।