बायपास सर्जरी से इंकार करने का मामला,हॉस्पिटल के प्रबंध संचालक को नोटिस

बालाघाट@ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ के के खोसला ने राज्य बीमारी सहायता निधि के एक प्रकरण में मरीज को उसकी बायपास सर्जरी करने से इंकार करने पर नागपुर के क्रिसेंट हॉस्पिटल एवं हार्ट सेंटर नागपुर के प्रबंध संचालक डॉ अजीज खान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है कि क्यों मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के रोगियों की कार्डियालॉजी एवं कार्डियोथोरोसिक सर्जरी के लिये उनकी संस्था को प्रदान की गई मान्यता निरस्त करने के लिए शासन को लिखा ।

लालबर्रा के गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले रोगी 69 वर्ष के अब्दुल समद खान द्वारा 08 जुलाई 2017 को क्रिसेंट हॉस्पिटल एण्ड हार्ट सेंटर नागपुर में ईको-कार्डियोग्राफी करवाने पर उसकी बायपास सर्जरी के लिये 02 लाख रुपये की राशि का प्राक्कलन जारी किया गया था। रोगी अब्दुल समद खान को नागपुर के इस अस्पताल में ऑपरेशन करवाने हेतु मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि के अंतर्गत राज्य शासन द्वारा निर्धारित पैकेज के अधीन एक लाख रुपये की स्वीकृति जारी की गई थी। रोगी अब्दुल समद खान द्वारा दिनांक 08 अगस्त 2017 को आवेदन प्रस्तुत कर अवगत कराया गया कि स्वीकृति आदेश के साथ वह ऑपरेशन के लिये भर्ती होने हेतु दिनांक 05 अगस्त 2017 को नागपुर के इस अस्पताल में उपस्थित होने पर उनके द्वारा स्वीकृत राशि रू. एक लाख में ऑपरेशन करने से मना कर दिया गया एवं रोगी को अस्पताल में भर्ती भी नहीं किया गया।

मध्यप्रदेश राज्य बीमारी सहायता निधि योजनांतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार के रोगियों की कार्डियालॉजी एवं कार्डियोथोरोसिक सर्जरी के लिये नागपुर के इस अस्पताल को मान्यता प्रदान की गई है, जिसकी मान्यता अवधि दिनांक 18 अगस्त 2017 तक है। मान्यता की शर्तों में स्पष्ट लेख है कि चिकित्सालय द्वारा राज्य शासन द्वारा निर्धारित दर पर ही रोगी का इलाज किया जावेगा तथा चिकित्सा संस्था का उपचार प्राक्कलन निर्धारित बीमारी के पैकेज की सीमा में हो, यदि प्राक्कलन पैकेज से अधिक का हो, तो संबंधित संस्था से उसका स्पष्टीकरण लिया जावे।
क्रिसेंट हॉस्पिटल एवं हार्ट सेंटर नागपुर के प्रबंध संचालक डॉ अजीज खान को 07 दिनों के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने कहा गया है। निर्धारित समय सीमा में लिखित प्रतिवाद प्रस्तुत न किये जाने अथवा जवाब संतोषप्रद न पाये जाने पर नागपुर की इस संस्था को भविष्य में मान्यता न दिये जाने हेतु प्रस्ताव भेजा जा सकता है।