स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने पेश किया न्यू इंडिया का खाका

71वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राष्ट्र को अपना पहला संबोधन दिया। उन्होंने नोटबंदी से लेकर स्‍वच्‍छ भारत अभियान, न्‍यू इंडिया, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी तमाम बातों का जिक्र किया। 2022 तक न्यू इंडिया बनाने की सरकार की अपील को दुहराते हुए. राष्‍ट्रपति कोविंद ने कहा कि समाज को ऐसा होना चाहिए, जो भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ, संवेदनशील भी हो।

देश के लिए लोगों से निस्वार्थ भाव से काम करने की अपील करते हुए राष्ट्रपति ने लोगो से समाज के निर्माण में .योगदान के तरीके खोजने को कहा। उन्होंने इस मौके पर आजादी के सपूतों को याद किया तो देश की सुरक्षा में लगे जवानों, पुलिसकर्मियों और देश सेवा में लगे किसानों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका की सराहा।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के प्रथम नागरिक रामनाथ कोविंद ने जब देश को संबोधित किया तो उनके भाषण में न केवल देश के विकास की उम्मीदें थी बल्कि नए भारत के निर्माण का खाका भी था। उन्होंने साफ कहा कि 2022 में आजादी के 75 साल पूरे होने तक ‘न्यू इंडिया’ के लक्ष्य को प्राप्त करना हमारा राष्ट्रीय संकल्प’ है।

71 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने देश को किया संबोधित करते हुए न्यू इंडिया का खाका पेश किया, राष्ट्रपति ने कहा 2022 तक तक ‘न्यू इंडिया’ के लक्ष्य को हासिल हमारा राष्ट्रीय संकल्प’, इसमें होगी समता, समानता और भाईचार, गरीबी की जगह नहीं होगी।

न्यू इंडिया का मतलब बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें हर परिवार के लिए घर, मांग के मुताबिक बिजली, बेहतर सड़कें और संचार के माध्यम,के साथ ही आधुनिक रेल नेटवर्क, तेज और सतत विकास होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि ‘न्यू इंडिया’ एक ऐसा समाज होना चाहिए, जो भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने के साथ-साथ, संवेदनशील भी हो। पारंपरिक रूप से वंचित लोग, चाहे वे अनुसूचित जाति के हों, जनजाति के हों या पिछड़े वर्ग के हों, देश के विकास प्रक्रिया में सहभागी बनें।

इस समाज में हम उन सभी लोगों को अपने भाइयों और बहनों की तरह गले लगाए, जो देश के सीमांत प्रदेशों में रहते हैं, और कभी-कभी खुद को देश से कटा हुआ सा महसूस करते हैं। अभाव ग्रस्त बच्चे, बुजुर्ग और बीमार वरिष्ठ नागरिक, और गरीब लोग, हमेशा हमारे विचारों के केंद्र में रहें। न्यू इंडिया में समानता पर आधारित समाज हो जहां बेटा और बेटी में कोई भेदभाव न हो, धर्म के आधार पर कोई भेदभाव न हो ये समाज मानव संसाधन रूपी हमारी पूंजी को समृद्ध करे,नौजवानों को कम खर्च पर शिक्षा पाने का अवसर देते हुए उन्हें समर्थ बनाए और जहां बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और कुपोषण एक चुनौती के रूप में न रहें।

देश के लिए लोगों से निस्वार्थ भाव से काम करने की अपील करते हुए राष्ट्रपति ने उन लोगों को नमन किया जिन्होंने पीएम मोदी की अपील पर गैसे सब्सिडी छोड़ दी। उन्होंने लोगो से समाज के निर्माण में .योगदान के तरीके खोजने को कहा। दुनिया में भारत की बढती भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020 के ओलंपिक खेल विश्व बिरादरी में भारत का सम्मान बढाने का एक और अवसर है।

सरकार के स्वच्छ भारत, शौचालय अभियान, बेटी बचाओ बेटी पढाओ , डिजिटल इंडिया , पारदर्शी प्रशासन अभियान और जीएसटी जैसे कानूनों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के प्रयासों को जनता तक पहुंचाने के लिए सबको मिलकर काम करना होगा । राष्ट्रपति ने आजादी के मौके पर देश को बधाई दी और भारत मां की स्वाधीनता के लिए शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। देश की सुरक्षा में तैनात सेना,अर्धसैनिक बलों, पुलिस , देश सेवा करने वाले किसान और स्वयंसेवी संस्थानों को भी उन्होंने सलाम किया और लोगों से इसे आत्मसात करने की अपील की ।