एक ख़्वाब : सरकार ने जन धन योजना वाले बैंक खाते में जमा कर दिए 50 लाख

मोबाइल में SMS आया है कि भारत सरकार ने 50 लाख रुपये मेरे “जन धन योजना वाले बैंक खाते में जमा कर दिए है । मैं बड़ी प्रसन्नता से उछलता हुआ कमरे से बाहर आया और सबको बोला – “देखो देखो अच्छे दिन आ गए मेरे बैंक खाते में 50 लाख आ गए” |

घर वाले बोले अधिक प्रसन्न न हो हमारे सबके खाते में भी 50 लाख आए है ये देखो | कसम से बड़ा दुःख हुआ मुझे | फिर सोचा चलो मित्रों को दिखाता हूँ | मित्र बोले – “अधिक ना उछल हमारे खाते में भी 50 लाख हैं” । सारी प्रसन्नता फिर गायब, फिर सोचा चलो दूकान पर खूब सामान लेता हूँ |

भाई साहब ये रामू चाचा की दूकान क्यों बंद है ? एक आदमी बोला- “भाई रामू चाचा ने तो दूकान बंद कर दी उन्हें अब दूकान की क्या आवश्यकता ? उनके खाते में तो 50 लाख आ गएे हैं अब काम नही करना पड़ेगा उन्हें” |

फिर सोचा चलो शॉपिंग माल में चलता हूँ | वहाँ देखा तो सब दुकान बंद थी उन लोगों को भी 50 लाख मिल गए थे !!!

सोचा कोई बात नही होटल में खूब खाना खाता हूँ, अपनी पसन्द का |

अंदर देखा सब लोग जा चुके थे, सुरक्षा गार्ड भी नही था मतलब वो भी अमीर बन गया था उसके पास भी अब 50 लाख थे |

बाजार गया तो सब रेहड़ी वाले, चाय वाले, जूस वाले, सब्जी वाले सब काम छोड़कर बैंक में जा चुके थे रूपये लेने क्योंकि अब किसी को काम करने की कोई आवश्यकता नही थी सबके पास “50 लाख” रूपये थे |

शहर से बाहर गया तो सब फैक्ट्री बंद, सब मजदूरों को 50 लाख मिल चुके थे | सब नाच गा रहे थे. . अच्छे दिन आ गए – अच्छे दिन आ गए |

शाम को खेतों की तरफ गया तो खेत में कोई नही था, सब किसान खेती छोड़ कर घर जा चुके थे | अब उनको धुप बारिश में काम करने की कोई आवश्यकता नही थी, वो भी अमीर बन चुके थे |

चिकित्सालय गया, देखा वहाँ डॉक्टर ताश खेल रहे थे | पूछने पर बोले हमे कोई उपचार नही करना अब 50 लाख काफी हैं, जीवन भर के लिए |

फिर पाँच दिन बाद पता चला अचानक लोग भूख से मरने लगे है, क्योंकि खेत में सब्जी नही उग रही है, सब राशन की दुकान बंद है, होटल ढ़ाबे भी बंद पड़े है | लोग बीमारी से मरने लगे हैं क्योंकि डॉक्टर भी नही हैं, पशु भी भूख से मर रहे है क्योंकि खेत से चारा नही मिल रहा, बच्चे भी भूख से रो रहे है क्योंकि पशु दूध नही दे रहे |

लोग सड़को पर भागे फिर रहे है एक-एक लाख रुपए हाथ में लिए – “ये लो भाई 50 हज़ार रुपए 100 ग्राम दूध दे दो, दो दिन से बच्चा भूख से मर रहा है” |

फिर दस दिन बाद लोग मरने लगे, कुछ जिन्दा लोग सड़कों पर रुपयों का बेग लिए घूम रहे है, भाई ये लो ये लो 5 लाख रूपए हमें बस पाँच किलो गेहूं दे दो’ दस दिन से भूखे हैं |

सब बाजार बंद हो चुके हैं, अनाज नही है किसी के पास, सब तरफ मुर्दा लोग दिख रहे है और मैं भी अपने “50 लाख” रूपए लिए भागा जा रहा हूँ – “ले लो भाई ले लो ये ’50 लाख’ बस रोटी का एक टुकड़ा दे दो” |

इतने में माँ की आवाज़ आई – “उठ जा आलसी कब से चारपाई को लात मार रही हूँ” | माँ बोली – “मर गया मर गया की आवाज़ लगा रहा है, कोई बुरा सपना देखा क्या” ?

मैं बोला- नही माँ बुरा नही “अच्छे दिनो” का सपना देखा, उनसे अच्छे तो ये “बुरे दिन” हैं गरीब सही मगर घर में, अनाज तो है, पानी है, बच्चे खेल रहे हैं, पशु खेत में चर रहे हैं, दुकानों पर भीड़ है, लोग आ जा रहे हैं | चल पड़ा मैं भी अपने काम पर ये सोचते हुए ! काश ये “50 लाख” कभी भी किसी के खाते में न आए तो अच्छा है, वरना फिर काम कौन करेगा ? जब सबके पास “50 लाख” होंगे !!!

निवेदन है अच्छे दिन लाने के लिए बलिदान ना सही पर हम कुछ छोटे काम तो कर ही सकते हैं जैसे कचरा सड़क पर ना फैंकें, सड़कों व दीवारों पे ना थूकें, नोटों व दीवारों पर ना लिखें, गाली देना छोड़ दें, पानी लाइट बचाएँ, एक पेड़ लगाएँ, ट्रेफिक नियम ना तोडें, रोज़ माता पिता का आशीर्वाद लें, सभ्य महहिलाओं व लड़कियों का सम्मान करें, एम्बुलेंस को रास्ता दें, झूठ ना बोलें, चोरी ना करें, ईमानदार बनें, नशा करना छोड़ दें | देश को नहीं, पहले स्वयं को बदलें |

अंत में यही कहूँगा कि ये ख़्वाब ही ऐसा था जिसे कभी सच नहीं होना चाहिए |