चीन से तनाव बढ़ने पर किया गया था 248 एस्ट्रा मिसाइल खरीदने का ऑर्डर
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नई दिल्ली​​​​।​ ​चीन सीमा पर तनाव के बीच​ ​​स्वदेशी ​​​​एस्ट्रा एमके​-​1​ ​​​बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर-टू-एयर 50 मिसाइलों को पहली खेप भारतीय वायु सेना को मिल गई है। यह करीब ​100 किलोमीटर की लम्बी दूरी तक ​​​हमले करने ​में सक्षम ​हैं​।​ एस्ट्रा एमके​-​1​ ​​​मिसाइलों को ​​सुखोई-30 एमकेआई ​से अधिकतम 66 हजार फीट की ऊंचाई पर 4.5 मैक स्पीड के साथ लांच लिया जा सकेगा​​​​​।​ भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले से​ ​​​एस्ट्रा ​​मिसाइल का इस्तेमाल कर रही हैं लेकिन लद्दाख सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद दोनों सेनाओं के लिए 248 मिसाइल खरीदने का ऑर्डर किया गया था।

​​चीन सीमा पर तनाव के बीच 2 जुलाई को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायु सेना और नौसेना के लिए 248 एस्ट्रा बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर मिसाइलों के अधिग्रहण को भी मंजूरी दी​ थी। ​​100 किलोमीटर की लम्बी दूरी तक हमले करने वाली बियॉन्ड विजुअल रेंज एयर टू एयर ‘​एस्ट्रा’ मिसाइलों से नौसेना और वायु सेना की ताकत कई गुना बढ़ेगी, क्योंकि इस मिसाइल की मारक क्षमता विजुअल रेंज से भी अधिक है।

​​एस्ट्रा ​मिसाइल 3.6 मीटर (12 फीट) लं​बी है, जिसका व्यास 178 मिमी (7.0 इंच) है और इसका वजन 154 किलोग्राम (340 पाउंड) है​​।​​ एस्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-काउंटरमेशर्स से लैस है​, इसलिए दुश्मन के प्रयासों ​को नाकाम करके अपने ऑपरेशन ​को अंजाम देती है।​ एस्ट्रा ​​मिसाइल 4.5 ​मैक ​की गति तक पहुंचा सकती है और अधिकतम 20 किमी​.​ (66​ हजार फीट) की ऊंचाई से ​संचालित हो सकती है। एस्ट्रा की अधिकतम सीमा हेड-ऑन चेस मोड में 110 किमी​.​ (68 मील) और टेल चेस मोड में 20 किमी​.​ (12 मील) है।​​​

​एस्ट्रा ​​मिसाइल​ की ​एयरफ्रेम, प्रोपल्शन सिस्टम, कंट्रोल सिस्टम, ड्यूल मोड गाइडेंस और नाइट फायरिंग क्षमता ​का परीक्षण करने के लिए तीन अलग-अलग कॉन्फ़िगरेशन में 2003 से 2012 तक जमीनी परीक्षण​ किये गए​। सुखोई-30 ​​एमकेआई पर 2009 और 2013 में कैरिज ट्रायल किया ​​गया था। मई 2014 में इसे पहली बार हवा में निकाल दिया गया था।

18 मार्च, 2016 को ​सुखोई-30​ ​​एमकेआई ​​से अभ्यास के दौरान ​​मिसाइल को​ ​सार्वजनिक रूप से निकाल दिया गया था। सितम्बर, 2017 में सात परीक्षणों की एक श्रृंखला के दौरान एस्ट्रा का दो बार परीक्षण किया गया था​​। 2019 में उपयोगकर्ता परीक्षणों के दौरान एस्ट्रा 90 किमी (56 मील) की दूरी पर एक लक्ष्य को मारने में कामयाब रही।​​​​ इसी के बाद इसे भारतीय वायुसेना और नौसेना में शामिल किया गया था​।

एस्ट्रा मार्क​-​1 के बाद भविष्य के लिए तीन नए वे​​रिएंट की योजना बनाई गई है।​ ​एस्ट्रा मार्क​-​2 की मारक क्षमता 160 किमी (99 मील) है जबकि प्रणोदन प्रणाली में लिक्विड-फ्यूल रैमजेट, सॉलिड-फ्यूल रैमजेट और डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर शामिल हैं। एस्ट्रा मार्क​-3 ​की ​अधिकतम रेंज​ फ्रांस की ​मिटयोर मिसाइल के बराबर 340 किमी (210 मील) ​होगी​।​ इस मिसाइल में नव विकसित ठोस ईंधन डक्टेड रैमजेट (एसएफडीआर) तकनीक का उपयोग ​किया जायेगा​​​।