पलनीसामी बने तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री

तमिलनाडु में लगभग दो हफ्ते से जारी राजनीतिक उठापटक के पहले दौर का आज अंत हो गया जब राज्यपाल ने शशिकला गुट के विधायक पलानीसामी को मुख्य मंत्री पद की शपथ दिलाई।
पलानीसामी ने शाम चार बजे राजभवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने पलानीसामी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। पलानीसामी के साथ 30 और मंत्रियों ने शपथ ली इनमें ज्यादातर मंत्री वहीं है जो जयललिता और पनीरसेल्वम सरकार में शामिल थे। इसके बाद पलानीसामी और उनके मंत्री जयललिता की समाधि पर गए और फूल माला चढ़ाया। पार्टी का कहना है कि सरकार जयललिता के कामों को पूरा करेगी।

इससे पहले सुबह साढ़े ग्यारह बजे पलानीसामी ने कुछ और नेता राज्यपाल के बुलावे पर उनसे मिलने राजभवन पहुंचे। सरकार गठन को लेकर जारी गतिरोध को खत्म करते हुए राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने अन्नाद्रमुक के विधायी दल के नेता पलानीसामी से कहा कि वह जल्द से जल्द अपने मंत्रिमंडल का गठन करें और 15 दिन के भीतर विधानसभा में विश्वास मत हासिल करें। इससे पहले मंगलवार को पलानीसामी ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया था और 124 विधायकों के समर्थन की चिट्ठी सौंपी थी।

जैसे ही पलानीस्‍वामी के नए मुख्यमंत्री बनने की ख़बर आई, शशिकला के समर्थकों ने उसका स्वागत किया और राज्यपाल के फैसले की सराहना की। पिछले एक सप्ताह से चेन्नई से 80 किमी दूर स्थित कूवाथुर रिजॉर्ट में रह रहे विधायकों ने मुस्कुराते हुए ‘चिन्नम्मा’ के नाम के नारे लगाए। ये वहीं विधायक हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा था कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है।

अचानक की राज्य की राजनीति के सबसे बड़े चेहरे बने पलनीसामी लो प्रोफाइल नेता माने जाते हैं। दो बार मंत्री रहे पलनीसामी 1989 में एडापडी से पहली बार विधायक बने। शशिकला गुट के नजदीकी माने जाने वाले पलानीसामी गाउंडर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। तमिलनाडु के पश्चिमी जिलों में गाउंडर समुदाय का ख़ासा असर देखा जाता है। पलानीसामी की अहमियत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक-तमिलनाडु के मुख्यमंत्रियों की बैठक में जयललिता का लिखित भाषण उन्होंने ही पढ़ा था।

तमिलनाडु में राजनीतिक अस्थिरता समाप्त हो गयी है और इसके साथ ही पलानीसामी के सामने चुनौती है जयललिता के कदमों पर चलते हुए जनता की उम्मीदों को पूरा करने की।