पीएम: समाज को नई दिशा देते हैं संत

प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को जगत गुरु माधवाचार्य के सातवें शताब्दी समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि हर समय में कोई न कोई संत समाज को नई दिशा देता है और समाज में फैली हुई बुराई के खिलाफ आंदोलन करता है।

संतो की ऐसी श्रंखला भारत के जीवंत समाज का ही प्रतिबिंब है, परिणाम है। समाज में जो भी चुनौती आती है, उसके उत्तर में आध्यात्मिक रूप में प्रकट होते हैं। इसलिए पूरे देश में शायद ही ऐसा कोई जिला या तालुका होगा, जहां कोई संत ना जन्मा हो। संत, भारतीय समाज की पीड़ा का उपाय बनकर आए। अपने जीवन, अपने उपदेश और साहित्य से उन्होंने समाज को सुधारने का काम किया।

सामाजिक बुराइयों को खत्म करते रहने की ऐसी महान संत परंपरा के कारण ही हम सदियों से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेज पाए हैं। ऐसी महान संत परंपरा के कारण ही हम राष्ट्रीय एकीकरण और राष्ट्रनिर्माण की अवधारणा को साकार करते आए हैं। ऐसे संत किसी युग तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि वे युगों-युगों तक अपना प्रभाव डालते रहे हैं।

उडुपी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि 1968 में उडुपी पहली ऐसी म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन बनी थी जिसने हाथ से मैला उठाने पर रोक लगाई थी। 1984 और 1989 में दो बार उडुपी को स्वच्छता के लिए सम्मानित किया गया था। स्वच्छता को लेकर, मानवीय मूल्यों को लेकर जनशक्ति जागृत करने की हमारी प्रतिबद्धता का ये शहर जीता-जागता उदाहरण रहा है।