बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित समारोह को पीएम मोदी ने किया संबोधित

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बुद्ध पूर्णिमा के मौक़े प्रधानमंत्री ने इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत की। वैशाख पूर्णिमा को महात्मा बुद्ध के बुद्धत्व की प्राप्ति दिन के रूप में मनाया जाता है। महात्मा को बोध गया में पीपल के पेड़ के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। माना यह भी जाता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।

महात्मा का जन्म 563 ईसा र्पूव लुम्बनी में हुआ था। जो कि अब नेपाल में है। उन्होने अहिंसा,शांति,सद्भाव और प्रेम के मार्ग पर चलने और जीवन जीने की शिक्षा दी थी। प्रधानमंत्री ने भगवान बुद्ध के करुणा के सिद्धांतों में विश्वास रखने की बात कही। साथ ही उन्होने कहा कि दुनिया में भारत की धरती ने हमेशा से मानवता ही सिखाया।

बुद्ध की शिक्षाओं का सार है- शील, समाधि और प्रज्ञा। इष्ट-अनिष्ट से परे समभाव में रति ‘प्रज्ञा’ है और सभी पापों से मुक्ति ‘शील’ है। उनके मुताबिक़ एक मानव का दूसरे मानव के साथ व्यवहार मानवता के आधार पर होना चाहिए, न कि जाति, वर्ण और लिंग आदि के आधार पर। प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्ध होने का मतलब दूसरों के लिए जीवन जीना सबका कल्याण करना ही है।

उन्होने बुद्ध की विरासत और ऐतिहासिक संरक्षण को भावी पीढ़ी के लिए अहम बताया उन्होने कहा कि मौजूदा सरकार ने 18 राज्यों में फैले बुद्ध की विरासत को संरक्षित कर रही है। साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि बुद्धिस्ट सर्किट के लिए 360 करोड़ से ज़्यादा खर्च कर रही है।