मांस की तस्करी में फंसे पुलिस कर्मी

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प्रयागराज :प्रदेश सरकार  प्रतिबंधित मांस पर प्रतिबंध लगाना चाहती है वही है। कि पुलिस विभाग इसका सहयोग ना कर के असहयोग कर रहा था। योगी सरकार जिस पुलिस के भरोसे प्रतिबंधित मांस की तस्करी पर रोक लगाना चाह रही है, वही इसकी दलाली में हाथ काला किए हुए हैं। यह सनसनीखेज रहस्योद्घाटन एसटीएफ की जांच में हुआ है। इसमें प्रयागराज, कौशांबी, फतेहपुर, जौनपुर, गाजीपुर और चंदौली के ऐसे 25 पुलिसकर्मियों का नाम सामने आया है, जो तस्करों का सहयोग करते हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है।स्पेशल टॉस्क फोर्स (एसटीएफ) ने 23 दिन पहले प्रतिबंधित मांस की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया था। उसमें कौशांबी के सरगना नसीर अहमद उर्फ पप्पू समेत पांच लोग गिरफ्तार हुए थे। एसटीएफ ने इसमें संलिप्त लोगों की छानबीन की तो पता चला कि तस्करों से कई पुलिस वालों के भी गहरे संबंध हैं। जांच में साफ हुआ कि फतेहपुर के ललौली, खागा, थरियांव थाने और कौशांबी के पूरामुफ्ती, कोखराज, सैनी थाने के कई पुलिसकर्मी तस्करों से आर्थिक लाभ लेते थे। प्रयागराज, चंदौली और जौनपुर जिले के हाईवे पर स्थित कुछ थानों के पुलिसकर्मी भी ऐसा कर रहे थे। प्रतिबंधित मांस लदे ट्रक पास कराने और इस धंधे में शामिल लोगों को संरक्षण देने में कई इंस्पेक्टरों से लेकर चौकी इंचार्ज, सिपाही और ड्राइवर तक शामिल हैं। इस सनसनीखेज पर्दाफाश से लखनऊ तक पुलिस महकमा हतप्रभ रह गया। इस मामले में कोई अफसर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। फिलहाल जांच रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जिसे शासन को भेजा जा रहा है। अफसरों तक भी पहुंचती थी मोटी रकम जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि तस्कर पुलिस वालों को 15 दिन में पैसा देते थे, ताकि थानेदार या चौकी प्रभारी का तबादला होने पर भी उन्हें दिक्कत न हो। गोरखधंधा बेरोकटोक चले, इसके लिए सिपाही से लेकर कई अफसरों तक हिस्सा पहुंचता था।  अभी भी फरार तस्कर पप्पू के सहयोगी मुजफ्फर, आमिर, जैद, उबैद, योगेंद्र, अंसाद अहमद, अफजल और दानिश अभी फरार हैं। प्रतिबंधित मांस के तस्करों से कुछ पुलिस कर्मियों की मिलीभगत सामने आई है। इसकी जांच की जा रही है। अभी इसमें कुछ नहीं कहा जा सकता। : नवेंदु कुमार, सीओ, एसटीएफ।[ ब्यूरो रिपोर्ट प्रयागराज]