महिलाओं में पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम की समस्या और इसके इलाज

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आज भी बहुत-सी महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग नहीं हैं, अपनी बीमारियों को लेकर लापरवाह रहती हैं। इस वजह से बाद में बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करती हैं। पॉली सिस्टिक ओवरी महिलों के प्रजनन सम्भंदित रोग है , जो की पहले तो बहुत छोटी से स्टेज से शुरू होता है और अगर इस पर ध्यान न दिया जाये तो यह एक बहुत घातक रोग का रूप ले लेता है | जिससे महिलाये गर्भधारण से वंचित हो सकती हैं , साथ ही साथ कैंसर जैसे और भी कई भिजनक रोग लग सकते हैं |

पॉली सिस्टिक ओवरी हार्मोन्स की वजह से होता है | हार्मोन्स हमरे शरीर में एक रासयनिक सन्देश–वाहक की तरह काम करते है | हार्मोन्स के जरा सा भी बदलाव बहुत से गंभीर बिमारियों को जमन दे देता है | पॉली सिस्टिक ओवरी की समस्या भी हार्मोन्स के बदलाव के कारन ही होती है |

हार्मोन्स के इन बदलाव की वजह से अगर मासिक चक्र बिगड़ जाये तो महिला की ओवेरी में एक छोटा सा अल्सर बन जाता है | इसका आभास जल्दी से नहीं होता | यह स्थिति काफी खतरनाक होती है अगर इसका इलाज समय पर ना किया जाये तो यह आगे चलकर कैंसर की बीमारी में भी बदल सकती है |

इन अल्सर्स में तरल पदार्थ भरा होता है और यह धीरे धीरे समय के साथ बढ़ते रहते है | यह थैली–नुमा रचनाये होती है | यही स्थिति को पॉली सिस्टिक ओवरी कहलाती है | यह समस्या इतनी हानिकारक है की यह महिलाओं को हमेशा के लिए बच्चे पैदा करने से वंचित कर सकती है |

पॉली सिस्टिक ओवरी के लक्षण

महिलाओं के चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल ऐनी शुरू हो जाते है , यह एक सटीक लक्षण है की महिला पॉली सिस्टिक ओवरी से पीड़ित है |

मासिक धरम आने की तरीखों का आगे पीछे होना | महीने में दो बार मासिक धरम आना या फिर किसी महीने एक बार भी मासिक धरम न आना |

महिलाओं का वजन बहुत तेजी से बढ़ना शुरू हो जाता है , यह भी पॉली सिस्टिक ओवरी का एक लक्षण है |

महिलाओं की चमड़ी पर तेल आना शुरू हो जाना और चेहरे पर दाग धब्बे और मुहासे काफी पैदा होना शुरू हो जाते हैं |

पॉली सिस्टिक ओवरी के कारन

समय पर खाना न खाने के कारन , रात को देर से सोने की आदत , जरूरत से अधिक व्यायाम और जरूरत से अधिक संबध बनाना भी इस समस्या को जनम देता है |