अवैध बूचड़खानों बन्द करने से गरमायी राजनीति

उत्तर प्रदेश में अवैध बूचड़खानों को बन्द करने की कार्रवाई से राज्य की राजनीति गर्मा गई है। हालांकि राज्य सरकार का ये कदम राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के कुछ साल पहले दिये आदेशों का अनुपालन है। साल 2013 के राष्ट्रीय हरित अधिकरण और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध बूचड़खाने बरसों से धडल्ले से चल रहे थे।

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि अवैध बूचड़खानों की वजह से जगह जगह खुली नालियों में जानवरों के खून और कचरे से जल प्रदूषण होता हैं इसके अलावा जानवरों की हड्डी और वसा निकालने के लिए इस्तेमाल किये जाने वाली भट्टियां जहरीली गैसों को रिलीज करती हैं जो वायू प्रदूषण के लिये जिम्मेदार है। इस बीच राज्य सरकार ने एक बार फिर साफ और सख्त शब्दों में कहा है कि यह अभियान सिर्फ अवैध बूचडखानों के खिलाफ है